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सावित्री माता एवं वट वृक्ष (ब्रह्मा-विष्णु-महेश)

वट पूर्णिमा व्रत पूजा विधि (कोंकणी — वटवृक्ष)

Last updated: 14 June 2026

वट पूर्णिमा कोंकणी सुहागिन महिलाओं का प्रमुख व्रत है — ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाया जाता है। महिलाएँ वट (बरगद) वृक्ष की परिक्रमा करते हुए सूती धागा बाँधती हैं — सावित्री-सत्यवान की कथा का स्मरण करती हैं। वट वृक्ष = ब्रह्मा (जड़), विष्णु (तना), महेश (शाखाएँ) — त्रिदेव का प्रतीक। कोंकणी शैली में नारियल तेल दीपक, आम-पल्लव, एवं विशेष नैवेद्य।

Occasion

ज्येष्ठ पूर्णिमा (जून)

Muhurat

प्रातःकाल — वट वृक्ष पूजा

Puja Samagri (Items Required)

  • सूती धागा (सफ़ेद/लाल
  • हल्दी, कुमकुम, सिन्दूर, चन्दन
  • नारियल, पान, सुपारी, फल
  • पुष्प, दूर्वा, तुलसी
  • दीपक (नारियल तेल), अगरबत्ती
  • पंचकज्जय, नारियल-गुड़ मिठाई

Puja Procedure — Steps

Step 1

वट वृक्ष अभिषेक

प्रातःकाल स्नान-शृंगार कर वट वृक्ष के पास जाएँ। वृक्ष की जड़ पर जल अर्पित करें। हल्दी-कुमकुम-सिन्दूर-चन्दन लगाएँ। दूर्वा-पुष्प अर्पित करें। नारियल तेल का दीपक जलाएँ।

Step 2

धागा बन्धन — परिक्रमा

सूती धागा लेकर वट वृक्ष की परिक्रमा प्रारम्भ करें — प्रत्येक परिक्रमा में धागा वृक्ष पर लपेटें। 7, 14, या 108 परिक्रमाएँ करें। "सावित्री-सत्यवान" कथा का स्मरण करें — सावित्री ने यमराज से पति का प्राण लौटाया।

Step 3

सावित्री-सत्यवान कथा

वट वृक्ष के नीचे बैठकर सावित्री-सत्यवान व्रत कथा सुनें/पढ़ें। सावित्री — आदर्श पत्नी — ने अपनी बुद्धि एवं भक्ति से यमराज को परास्त किया। "ॐ सावित्र्यै नमः" जपें।

Step 4

नैवेद्य एवं प्रसाद

पंचकज्जय, नारियल-गुड़ मिठाई, फल नैवेद्य अर्पित करें। कर्पूर आरती। सुहागिन महिलाओं को हल्दी-कुमकुम बाँटें। प्रसाद बाँटें।

Main Mantra

ॐ सावित्र्यै नमः ।

वट वृक्षाय विद्महे, सर्वदेवाय धीमहि ।
तन्नो वृक्षः प्रचोदयात् ॥

Benefits of this Puja

वट पूर्णिमा से सावित्री माता की कृपा, पति-दीर्घायु, गृह-समृद्धि, त्रिदेव आशीर्वाद, कोंकणी स्त्री-शक्ति।

Important Notes

• वट वृक्ष = त्रिदेव (ब्रह्मा-विष्णु-महेश) का प्रतीक। • 7/14/108 परिक्रमाएँ = धागा बन्धन — अनिवार्य। • सावित्री-सत्यवान कथा = अनिवार्य श्रवण। • हल्दी-कुमकुम वितरण = कोंकणी शैली। • नारियल तेल दीपक = तटीय परम्परा।

सदांच विचारिल्ले प्रस्न

वट पूर्णिमा व्रत पूजा विधि (कोंकणी — वटवृक्ष) केन्ना करतात आनी शुभ मुहूर्त खंयचो?

ज्येष्ठ पूर्णिमा (जून) — प्रातःकाल — वट वृक्ष पूजा

वट पूर्णिमा व्रत पूजा विधि (कोंकणी — वटवृक्ष) खातीर खंयची पूजा सामग्री जाय?

सूती धागा (सफ़ेद/लाल, हल्दी, कुमकुम, सिन्दूर, चन्दन, नारियल, पान, सुपारी, फल, पुष्प, दूर्वा, तुलसी, दीपक (नारियल तेल), अगरबत्ती, पंचकज्जय, नारियल-गुड़ मिठाई

वट पूर्णिमा व्रत पूजा विधि (कोंकणी — वटवृक्ष)ंत खंयचो मंत्र जपतात?

ॐ सावित्र्यै नमः । वट वृक्षाय विद्महे, सर्वदेवाय धीमहि । तन्नो वृक्षः प्रचोदयात् ॥

वट पूर्णिमा व्रत पूजा विधि (कोंकणी — वटवृक्ष) केल्यान खंयचे लाभ मेळटात?

वट पूर्णिमा से सावित्री माता की कृपा, पति-दीर्घायु, गृह-समृद्धि, त्रिदेव आशीर्वाद, कोंकणी स्त्री-शक्ति।

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