वट पूर्णिमा व्रत पूजा विधि (कोंकणी — वटवृक्ष)
वट पूर्णिमा कोंकणी सुहागिन महिलाओं का प्रमुख व्रत है — ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाया जाता है। महिलाएँ वट (बरगद) वृक्ष की परिक्रमा करते हुए सूती धागा बाँधती हैं — सावित्री-सत्यवान की कथा का स्मरण करती हैं। वट वृक्ष = ब्रह्मा (जड़), विष्णु (तना), महेश (शाखाएँ) — त्रिदेव का प्रतीक। कोंकणी शैली में नारियल तेल दीपक, आम-पल्लव, एवं विशेष नैवेद्य।
ज्येष्ठ पूर्णिमा (जून)
प्रातःकाल — वट वृक्ष पूजा
Puja Samagri (Items Required)
- सूती धागा (सफ़ेद/लाल
- हल्दी, कुमकुम, सिन्दूर, चन्दन
- नारियल, पान, सुपारी, फल
- पुष्प, दूर्वा, तुलसी
- दीपक (नारियल तेल), अगरबत्ती
- पंचकज्जय, नारियल-गुड़ मिठाई
Puja Procedure — Steps
वट वृक्ष अभिषेक
प्रातःकाल स्नान-शृंगार कर वट वृक्ष के पास जाएँ। वृक्ष की जड़ पर जल अर्पित करें। हल्दी-कुमकुम-सिन्दूर-चन्दन लगाएँ। दूर्वा-पुष्प अर्पित करें। नारियल तेल का दीपक जलाएँ।
धागा बन्धन — परिक्रमा
सूती धागा लेकर वट वृक्ष की परिक्रमा प्रारम्भ करें — प्रत्येक परिक्रमा में धागा वृक्ष पर लपेटें। 7, 14, या 108 परिक्रमाएँ करें। "सावित्री-सत्यवान" कथा का स्मरण करें — सावित्री ने यमराज से पति का प्राण लौटाया।
सावित्री-सत्यवान कथा
वट वृक्ष के नीचे बैठकर सावित्री-सत्यवान व्रत कथा सुनें/पढ़ें। सावित्री — आदर्श पत्नी — ने अपनी बुद्धि एवं भक्ति से यमराज को परास्त किया। "ॐ सावित्र्यै नमः" जपें।
नैवेद्य एवं प्रसाद
पंचकज्जय, नारियल-गुड़ मिठाई, फल नैवेद्य अर्पित करें। कर्पूर आरती। सुहागिन महिलाओं को हल्दी-कुमकुम बाँटें। प्रसाद बाँटें।
Main Mantra
ॐ सावित्र्यै नमः । वट वृक्षाय विद्महे, सर्वदेवाय धीमहि । तन्नो वृक्षः प्रचोदयात् ॥
Benefits of this Puja
वट पूर्णिमा से सावित्री माता की कृपा, पति-दीर्घायु, गृह-समृद्धि, त्रिदेव आशीर्वाद, कोंकणी स्त्री-शक्ति।