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माता नंदा देवी (पार्वती रूप)
माता नंदा देवी (पार्वती रूप)

नंदा देवी राज जात विधि — गढ़वाली

Last updated: 14 June 2026

नंदा देवी राज जात गढ़वाल की सबसे भव्य अर पवित्र यात्रा छ — हर 12 साल मा एक बार होंदी छ। ये 280 किलोमीटर की पैदल यात्रा छ जो नौटी गांव से शुरू होई कै होमकुंड तक जान्दी छ। नंदा अष्टमी मा शुरू हूंदी छ। चार सींग वालो खाडू (भेड़ा) अगवानी करदो छ। ये यात्रा माता नंदा देवी की ससुराल (कैलाश) विदाई को प्रतीक छ। लाखों श्रद्धालु भाग लेंदन।

Occasion

प्रत्येक 12 वर्ष मा, नंदा अष्टमी (अगस्त-सितम्बर)

Muhurat

नंदा अष्टमी (भाद्रपद शुक्ल अष्टमी)

Puja Samagri (Items Required)

  • नंदा देवी की छतर (छत्र/पालकी)
  • चार सींग वालो खाडू (भेड़ा)
  • ढोल-दमाऊ, नगाड़ा, तुरही
  • फूल-माला, बुरांश, ब्रह्मकमल
  • धूप, कपूर, अगरबत्ती
  • नैवेद्य (फल, मिठाई, प्रसाद)
  • गंगाजल, पंचामृत
  • चावल, रोली, हल्दी, सिन्दूर

Puja Procedure — Steps

Step 1

नौटी मा शुभारम्भ

नौटी गांव (चमोली) मा नंदा देवी मंदिर से राज जात शुरू हूंदी छ। पुजारी विधिवत पूजा करदन, नंदा देवी की छतर (पालकी) सजाई जान्दी छ। चार सींग वालो खाडू अगवानी करदो छ। ढोल-दमाऊ अर नगाड़ा बजदा छ।

Step 2

यात्रा मार्ग

राज जात 280 किमी की कठिन पहाड़ी यात्रा छ — नौटी से वान, बेदनी बुग्याल, रूपकुंड, शिला समुद्र होते हुए होमकुंड तक। 15,000 फीट से ऊंचाई मा जान्दी छ। रास्ते मा हर गांव मा स्वागत हूंदो छ, भजन-कीर्तन चलदो छ।

Step 3

बेदनी बुग्याल मा पूजा

बेदनी बुग्याल (अल्पाइन घास का मैदान) मा राज जात रुकदी छ। यहां नंदा देवी की विशेष पूजा हूंदी छ। ब्रह्मकमल चढ़ाया जान्दो छ — ये दुर्लभ हिमालयी फूल बहुत पवित्र छ।

Step 4

होमकुंड मा अंतिम पूजा

होमकुंड — नंदा देवी की अंतिम विदाई को स्थान। यहां हवन हूंदो छ, ब्रह्मकमल अर्पित हूंदा छ, चार सींग वालो खाडू कू छोड़ दिया जान्दो छ — वो कैलाश की दिशा मा जान्दो छ। ये माता नंदा की ससुराल विदाई छ — सब भाव-विभोर हूंदन।

Step 5

वापसी अर समापन

होमकुंड से श्रद्धालु वापस आंदन। नौटी मा समापन पूजा हूंदी छ। सब कू प्रसाद दिया जान्दो छ। अगली राज जात 12 साल बाद हूंदी छ — तब तक छोटी नंदा जात हर साल होंदी छ।

Main Mantra

ॐ नंदा देव्यै नमः।
नंदा भगवती, हिमालय की बेटी,
तेरी राज जात मा सब आयो छन,
हमरी माता जी, ससुराल कू जा,
पर फिर आइ जाया — देवभूमि तेरो इंतज़ार करदी छ।

Benefits of this Puja

नंदा देवी राज जात से अपार पुण्य, माता नंदा का आशीर्वाद, पापों का नाश, हिमालय की दुर्लभ यात्रा को अनुभव अर सामूहिक भक्ति को आनंद मिलदो छ।

Important Notes

• राज जात 12 साल मा एक बार ई होंदी छ — अवसर मत चूको। • शारीरिक तैयारी ज़रूर करो — 280 किमी पैदल चलणो छ। • ब्रह्मकमल केवल देवता कू अर्पित करो — तोड़ कै घर मत लाओ। • चार सींग वालो खाडू कू छूना मत — वो पवित्र छ। • स्थानीय नियम अर पुजारियों की बात मानो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नंदा देवी राज जात विधि — गढ़वाली कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?

प्रत्येक 12 वर्ष मा, नंदा अष्टमी (अगस्त-सितम्बर) — नंदा अष्टमी (भाद्रपद शुक्ल अष्टमी)

नंदा देवी राज जात विधि — गढ़वाली के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?

नंदा देवी की छतर (छत्र/पालकी), चार सींग वालो खाडू (भेड़ा), ढोल-दमाऊ, नगाड़ा, तुरही, फूल-माला, बुरांश, ब्रह्मकमल, धूप, कपूर, अगरबत्ती, नैवेद्य (फल, मिठाई, प्रसाद), गंगाजल, पंचामृत, चावल, रोली, हल्दी, सिन्दूर

नंदा देवी राज जात विधि — गढ़वाली में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?

ॐ नंदा देव्यै नमः। नंदा भगवती, हिमालय की बेटी, तेरी राज जात मा सब आयो छन, हमरी माता जी, ससुराल कू जा, पर फिर आइ जाया — देवभूमि तेरो इंतज़ार करदी छ।

नंदा देवी राज जात विधि — गढ़वाली करने से क्या लाभ मिलते हैं?

नंदा देवी राज जात से अपार पुण्य, माता नंदा का आशीर्वाद, पापों का नाश, हिमालय की दुर्लभ यात्रा को अनुभव अर सामूहिक भक्ति को आनंद मिलदो छ।

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