
महा शिवरात्रि (शिव विवाह) बिधि
महा शिवरात्रि भोजपुरी इलाका में "शिव विवाह" (शिव के बियाह) के रूप में मनावल जाला। चार पहर के पूजा, निशिजागरण, बेलपत्र चढ़ावल आ शिव-पार्वती के विवाह के बारात (जुलूस) — ई सब भोजपुरी परंपरा बा। बनारस (काशी विश्वनाथ), देवघर (बैद्यनाथ) आ गोरखपुर में लाखों लोग आवेला। "बोल बम" के जयकारा पूरा इलाका में गूँजेला।
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (फरवरी–मार्च)
निशिजागरण — चार पहर में पूजा
Puja Samagri (Items Required)
- शिवलिंग
- बेलपत्र (त्रिपत्र)
- दूध, दही, घी, शहद, चीनी (पंचामृत)
- धतूरा, आकमद के फूल
- गंगाजल
- भाँग (प्रसाद के रूप में)
- घी के दीया, धूप, कपूर
Puja Procedure — Steps
पहिला पहर
संझा 6–9 बजे शिवलिंग पर दूध से अभिषेक करीं। बेलपत्र चढ़ाईं। "ॐ नमः शिवाय" जप करीं।
दूसरा, तीसरा आ चौथा पहर
रात 9–12 बजे दही, 12–3 बजे घी, 3–6 बजे शहद से अभिषेक करीं। रात भर जागीं।
शिव विवाह
शिव-पार्वती के विवाह के बारात (जुलूस) निकालीं। ढोल-नगाड़ा बजाईं। "बोल बम" के जयकारा लगाईं। शिव विवाह के गीत गाईं।
आरती आ प्रसाद
शिव आरती करीं। भाँग-ठंडाई, बेलफल के प्रसाद बँटाईं।
Main Mantra
ॐ नमः शिवाय। बोल बम! हर हर महादेव! शिव शंभु भोलेबाबा के जय! गौरा-शंकर के बियाह भइल!
Benefits of this Puja
शिवरात्रि पूजा से पापनाश, मनोकामना पूर्ति, रोगमुक्ति, मोक्ष प्राप्ति आ शिव-पार्वती के आशीर्वाद मिलेला।