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पूजा घर का वास्तु

अंतिम अपडेट: 14 जून 2026

पूजा घर हिंदू परिवार का आध्यात्मिक केंद्र है। इसकी दिशा, मूर्ति का मुख और पवित्र सामग्री का स्थान वास्तु शास्त्र के अनुसार होने पर ही दैवीय ऊर्जा अधिकतम होती है।

व्यावहारिक वास्तु टिप्स

  • पूजा घर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में बनाएं।
  • मूर्तियां पश्चिम मुखी रखें ताकि आप पूर्व की ओर बैठें।
  • मूर्तियों के बीच कम से कम एक इंच की दूरी रखें।
  • पूजा घर की दीवारों पर हल्का पीला, सफेद या क्रीम रंग करें।
  • दीपक या ज्योति आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में रखें।
  • घर के मंदिर में महाकाली जैसे उग्र रूप न रखें — ये मंदिर में पूजे जाते हैं।
  • पूजा घर रोज़ाना साफ करें; सुबह जल और फूल बदलें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूजा घर किस दिशा में बनाएं?

पूजा घर के लिए ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) सबसे शुभ दिशा है। यह ब्रह्मा का कोना है और देवत्व, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है।

मूर्तियों का मुख किस दिशा में होना चाहिए?

मूर्तियों का मुख पश्चिम या पूर्व की ओर होना चाहिए। यदि मूर्तियां पश्चिम मुखी रखें तो पूजा करते समय आप पूर्व की ओर बैठेंगे — यह सबसे शुभ है।

क्या बेडरूम में पूजा घर बना सकते हैं?

मास्टर बेडरूम में पूजा घर आदर्श नहीं है, लेकिन यदि और कोई स्थान न हो तो पर्दे से इसे अलग करें। सोते समय मूर्तियां ढक दें और कभी भी मूर्तियां ज़मीन पर या बिस्तर के सामने न रखें।

पूजा घर में क्या नहीं रखना चाहिए?

मृत पूर्वजों की तस्वीरें, टूटी मूर्तियां, कूड़ादान, जूते-चप्पल, चमड़े की वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। पूजा घर की दीवार शौचालय से नहीं लगनी चाहिए।

मूर्तियों की ऊँचाई कितनी होनी चाहिए?

बैठकर पूजा करते समय मूर्तियां छाती के स्तर पर (लगभग 18-24 इंच ज़मीन से) होनी चाहिए। मूर्तियां सीधे ज़मीन पर या आँख के स्तर से ऊपर कभी न रखें।

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