
तीजरी — सिंधी करवा चौथ व्रत विधि
तीजरी सिंधी हिंदू महिलाओं का प्रमुख व्रत है — यह करवा चौथ का सिंधी संस्करण है। सुहागन स्त्रियां और कुंवारी लड़कियां चंद्रमा के लिए व्रत रखती हैं। तीजरी कथा (व्रत कहानी) सुनना अनिवार्य है। चंद्रमा को अर्घ्य (जल अर्पण) देकर व्रत खोला जाता है।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी (अक्टूबर-नवंबर)
सायंकाल — चंद्रोदय पर
Puja Samagri (Items Required)
- छलनी
- करवा / लोटा
- सिंदूर, मेहंदी, चूड़ियां
- दीपक, अगरबत्ती
- मिठाई, फल
Puja Procedure — Steps
सरगी & व्रत
सूर्योदय से पहले सरगी (सास द्वारा दिया गया भोजन) खाएं। सूर्योदय के बाद निर्जला व्रत शुरू — पूरे दिन जल भी नहीं पीना। सोलह श्रृंगार करें।
तीजरी कथा
सायंकाल महिलाएं एकत्र हों। तीजरी की कथा (व्रत कहानी) बड़ी-बूढ़ी महिला द्वारा सुनाई जाती है। कथा में पति-पत्नी के अटूट प्रेम का वर्णन होता है।
चंद्रमा को अर्घ्य
चंद्रोदय होने पर छलनी से चंद्रमा देखें। करवे (लोटे) से चंद्रमा को जल अर्पण करें। "ओम चंद्राय नमः" बोलें। पति का चेहरा छलनी से देखें।
व्रत पारण & पलव
पति द्वारा पत्नी को पहला निवाला खिलाया जाता है। पतिव्रता स्त्रियां पलव करें। मिठाई और फल खाकर व्रत संपन्न होता है।
Main Mantra
ओम चंद्राय नमः । चंदा मामा दूर के, पूजे गए बटाशे । स्वामी-स्वामिनी चिरायु हों ।
Benefits of this Puja
पति की दीर्घायु, दांपत्य सुख, चंद्र देव कृपा।