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चंद्र देव, शिव-पार्वती
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तीजरी — सिंधी करवा चौथ व्रत विधि

Last updated: 14 June 2026

तीजरी सिंधी हिंदू महिलाओं का प्रमुख व्रत है — यह करवा चौथ का सिंधी संस्करण है। सुहागन स्त्रियां और कुंवारी लड़कियां चंद्रमा के लिए व्रत रखती हैं। तीजरी कथा (व्रत कहानी) सुनना अनिवार्य है। चंद्रमा को अर्घ्य (जल अर्पण) देकर व्रत खोला जाता है।

Occasion

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी (अक्टूबर-नवंबर)

Muhurat

सायंकाल — चंद्रोदय पर

Puja Samagri (Items Required)

  • छलनी
  • करवा / लोटा
  • सिंदूर, मेहंदी, चूड़ियां
  • दीपक, अगरबत्ती
  • मिठाई, फल

Puja Procedure — Steps

Step 1

सरगी & व्रत

सूर्योदय से पहले सरगी (सास द्वारा दिया गया भोजन) खाएं। सूर्योदय के बाद निर्जला व्रत शुरू — पूरे दिन जल भी नहीं पीना। सोलह श्रृंगार करें।

Step 2

तीजरी कथा

सायंकाल महिलाएं एकत्र हों। तीजरी की कथा (व्रत कहानी) बड़ी-बूढ़ी महिला द्वारा सुनाई जाती है। कथा में पति-पत्नी के अटूट प्रेम का वर्णन होता है।

Step 3

चंद्रमा को अर्घ्य

चंद्रोदय होने पर छलनी से चंद्रमा देखें। करवे (लोटे) से चंद्रमा को जल अर्पण करें। "ओम चंद्राय नमः" बोलें। पति का चेहरा छलनी से देखें।

Step 4

व्रत पारण & पलव

पति द्वारा पत्नी को पहला निवाला खिलाया जाता है। पतिव्रता स्त्रियां पलव करें। मिठाई और फल खाकर व्रत संपन्न होता है।

Main Mantra

ओम चंद्राय नमः ।

चंदा मामा दूर के, पूजे गए बटाशे ।

स्वामी-स्वामिनी चिरायु हों ।

Benefits of this Puja

पति की दीर्घायु, दांपत्य सुख, चंद्र देव कृपा।

Important Notes

• तीजरी सिंधी करवा चौथ है — सिंधी महिलाओं का सबसे महत्वपूर्ण व्रत। • निर्जला (बिना जल) व्रत अनिवार्य — सूर्योदय से चंद्रोदय तक। • तीजरी कथा सुनना अनिवार्य — कथा के बिना व्रत अपूर्ण। • कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर की कामना से व्रत रखती हैं। • पलव हर सिंधी पूजा में किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तीजरी — सिंधी करवा चौथ व्रत विधि कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी (अक्टूबर-नवंबर) — सायंकाल — चंद्रोदय पर

तीजरी — सिंधी करवा चौथ व्रत विधि के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?

छलनी, करवा / लोटा, सिंदूर, मेहंदी, चूड़ियां, दीपक, अगरबत्ती, मिठाई, फल

तीजरी — सिंधी करवा चौथ व्रत विधि में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?

ओम चंद्राय नमः । चंदा मामा दूर के, पूजे गए बटाशे । स्वामी-स्वामिनी चिरायु हों ।

तीजरी — सिंधी करवा चौथ व्रत विधि करने से क्या लाभ मिलते हैं?

पति की दीर्घायु, दांपत्य सुख, चंद्र देव कृपा।

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