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प्रकृति देवी, देई (देहरी की देवी)

फूल देई विधि — गढ़वाली

Last updated: 14 June 2026

फूल देई गढ़वाल को सबसे प्यारो बसंत त्योहार छ। चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) मा छोटी च्याली (लड़कियां) सबेरे-सबेरे फ्योंली, बुरांश अर जंगली फूलन कू चुनी कै घरों की देहली (दरवाज़े) मा सजांदी छन। ये प्रकृति की खुशी, नई ऋतु को स्वागत अर गांव मा समृद्धि की कामना को त्योहार छ। च्याली लोग गीत गांदी छन: "फूल देई, छम्मा देई, दैणी द्वार भर भकार..."

Occasion

चैत्र मास प्रथम दिन से (मार्च-अप्रैल)

Muhurat

सूर्योदय से पहले, चैत्र संक्रान्ति

Puja Samagri (Items Required)

  • फ्योंली के फूल (पीले जंगली फूल)
  • बुरांश के फूल (लाल)
  • अन्य जंगली फूल (सरसों, कचनार)
  • चावल का आटा (पिसे चावल)
  • गुड़ अर घी
  • देई
  • रिंगाल की टोकरी (फूल रखन कू)
  • हल्दी पानी

Puja Procedure — Steps

Step 1

फूल चुनना

सबेरे-सबेरे सूरज निकलन से पहली च्याली (छोटी लड़कियां) जंगल अर खेतन मा जान्दी छन। फ्योंली (पीले जंगली फूल), बुरांश (लाल फूल), सरसों अर कचनार के फूल चुन्दी छन। रिंगाल की टोकरी मा भरी कै लांदी छन।

Step 2

देहली सजाना

हर घर की देहली (दरवाज़े की चौखट) मा फूल सजाओ। चावल के आटे से रंगोली बणाओ अर बीच मा फूल रखो। फ्योंली अर बुरांश को मिश्रण सबसे शुभ माना जान्दो छ।

Step 3

फूल देई गीत गाना

च्याली लोग देहली मा फूल रखते हुए गीत गांदी छन: "फूल देई, छम्मा देई, दैणी द्वार भर भकार, यो देई कू नमस्कार।" ये गीत घर मा समृद्धि अर खुशहाली की कामना करदो छ।

Step 4

देई बणाना

घर की बड़ी महिलायें चावल के आटे कू गुड़ अर घी मा मिलाई कै "देई" बणांदी छन — ये एक प्रकार को पिट्ठा/रोटी छ। च्याली लोग कू प्रसाद के रूप मा दिया जान्दो छ।

Step 5

आशीर्वाद अर भोज

जब च्याली फूल सजाई कै आंदी छन तो घर वाले आशीर्वाद देंदन अर देई, गुड़, पैसे भेंट मा देंदन। पूरा गांव मा खुशी को माहौल हूंदो छ।

Main Mantra

फूल देई, छम्मा देई,
दैणी द्वार भर भकार,
यो देई कू नमस्कार।
फूल देई, फूल देई,
जतुक देला उतुक पाया,
यो देई कू बारम्बार सजाया।

Benefits of this Puja

फूल देई से प्रकृति को आशीर्वाद, घर मा समृद्धि अर अन्न-धन, बच्चियों मा संस्कार अर सामुदायिक एकता को विकास हूंदो छ। ये बसंत को स्वागत छ।

Important Notes

• फूल सूरज निकलन से पहली चुनो — ये परम्परा छ। • केवल छोटी लड़कियां (च्याली) ई फूल सजांदी छन — ये उँकी विशेष भूमिका छ। • प्लास्टिक के फूल कभी मत वर्तो — असली फूल ई लगाओ। • गांव के हर घर मा फूल ज़रूर रखो — कोई घर छोड़ना मत। • च्याली कू सम्मान दियो अर उपहार दियो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फूल देई विधि — गढ़वाली कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?

चैत्र मास प्रथम दिन से (मार्च-अप्रैल) — सूर्योदय से पहले, चैत्र संक्रान्ति

फूल देई विधि — गढ़वाली के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?

फ्योंली के फूल (पीले जंगली फूल), बुरांश के फूल (लाल), अन्य जंगली फूल (सरसों, कचनार), चावल का आटा (पिसे चावल), गुड़ अर घी, देई, रिंगाल की टोकरी (फूल रखन कू), हल्दी पानी

फूल देई विधि — गढ़वाली में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?

फूल देई, छम्मा देई, दैणी द्वार भर भकार, यो देई कू नमस्कार। फूल देई, फूल देई, जतुक देला उतुक पाया, यो देई कू बारम्बार सजाया।

फूल देई विधि — गढ़वाली करने से क्या लाभ मिलते हैं?

फूल देई से प्रकृति को आशीर्वाद, घर मा समृद्धि अर अन्न-धन, बच्चियों मा संस्कार अर सामुदायिक एकता को विकास हूंदो छ। ये बसंत को स्वागत छ।

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