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जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु, छाया महतारी॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े। पान सुपारी ध्वजा नारियल ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥
ओम जय शिव कुमारा, स्वामी जय शिव कुमारा। पार्वती नन्दन, तुम हो प्राण-अधारा॥
आरती कीजै श्री रघुवर जी की, सच्चिदानंद शिव सुंदर की,