Kand 7
उत्तरकाण्ड
Uttar Kand
उत्तरकाण्ड में रामराज्य का आदर्श, समाज की मर्यादा, भक्ति का फल और श्रीराम चरित के उपदेशात्मक निष्कर्ष मिलते हैं।
मुख्य विषय: रामराज्य की व्यवस्था, नीति, लोककल्याण और मानस का महात्म्य
पद 1उत्तरकाण्ड रामराज्य
राम राज बैठें त्रैलोका।
हरषित भए गए सब सोका॥
हिंदी अर्थ
रामराज्य स्थापित होते ही तीनों लोक आनंदित हुए और सभी दुख दूर हो गए।
पद 2उत्तरकाण्ड आदर्श शासन
दैहिक दैविक भौतिक तापा।
राम राज नहिं काहुहि व्यापा॥
हिंदी अर्थ
रामराज्य में दैहिक, दैविक और भौतिक किसी प्रकार का कष्ट किसी को नहीं सताता।
पद 3उत्तरकाण्ड सामाजिक समता
सब नर करहिं परस्पर प्रीती।
चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥
हिंदी अर्थ
सब लोग परस्पर प्रेम करते हैं और अपने-अपने धर्म तथा नीति का पालन करते हैं।
पद 4उत्तरकाण्ड मर्यादा
बरनाश्रम निज निज धरम निरत बेद पथ लोग।
चलहिं सदा पावहिं सुखहि नहिं भय सोक न रोग॥
हिंदी अर्थ
वर्णाश्रम का संतुलन और वेदमार्ग का पालन होने से समाज में सुख, निडरता और स्वास्थ्य रहता है।
पद 5उत्तरकाण्ड भक्ति फल
कलिमल हरनि राम गुन गाथा।
गावत सुनत पावइ परिमाथा॥
हिंदी अर्थ
रामगुण-गाथा कलियुग के दोषों को हरने वाली है; इसका गान और श्रवण उच्च कल्याण देता है।
पद 6उत्तरकाण्ड सार
रामचरितमानस एहि नामा।
सुनत श्रवण पाइअ बिश्रामा॥
हिंदी अर्थ
रामचरितमानस का श्रवण मन को शांति, स्थिरता और परम विश्राम देता है।
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