📖 बालकाण्ड पाठ श्री रामचरितमानस — गोस्वामी तुलसीदास जी कृत — राम जन्म, बाललीला, सीता-स्वयंवर एवं दिव्य विवाह
1. मंगलाचरण
श्री गणेश, सरस्वती, शिव-पार्वती, गुरु एवं भगवान श्रीराम की मंगल स्तुति — रामचरितमानस के पावन आरम्भ हेतु शुभ वन्दना
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
2. कथा प्रारम्भ — शिव-पार्वती संवाद
भगवान शिव द्वारा देवी पार्वती को श्रीराम की दिव्य कथा सुनाना — रामचरितमानस की पावन कथा का शुभारम्भ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
3. अवतार कारण
भगवान श्रीराम के अवतार के दिव्य कारण — रावण का अत्याचार, पृथ्वी एवं देवताओं की प्रार्थना तथा नारद जी का शाप-प्रसंग
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
4. राम जन्म
अयोध्या में भगवान श्रीराम का दिव्य प्राकट्य — माता कौसल्या का आनन्द, गुरु वशिष्ठ द्वारा नामकरण संस्कार एवं मंगल उत्सव
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
5. बालचरित
भगवान श्रीराम और उनके भाइयों की मनमोहक बाल-लीलाएँ — दिव्य खेल, गुरु वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा-दीक्षा
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
6. विश्वामित्र आगमन
महामुनि विश्वामित्र का राजा दशरथ के दरबार में आगमन, राम-लक्ष्मण को यज्ञ-रक्षा हेतु अपने साथ ले जाना एवं दिव्य अस्त्र-विद्या प्रदान करना
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
7. ताड़का-वध एवं सिद्धाश्रम
श्रीराम द्वारा राक्षसी ताड़का का वध, मारीच-सुबाहु का संहार एवं सिद्धाश्रम में पावन यज्ञ की रक्षा
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
8. अहल्या उद्धार
भगवान श्रीराम के पावन चरण-स्पर्श से अहल्या का गौतम ऋषि के शाप से उद्धार — पतित-पावन नाम की सार्थकता
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
9. जनकपुर आगमन
श्रीराम और लक्ष्मण का जनकपुर (मिथिला) आगमन — नगरवासियों का मोहित होना, सीता-राम का प्रथम दर्शन एवं प्रेम का उदय
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
10. धनुष-यज्ञ एवं सीता-स्वयंवर
श्रीराम द्वारा सहज ही शिव-धनुष का भंजन, सीता जी का वरण — दिव्य जयमाला, देवताओं की दुंदुभी एवं सम्पूर्ण लोक में उत्सव
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
11. परशुराम संवाद
धनुष-भंग के पश्चात् परशुराम और लक्ष्मण के मध्य तीव्र संवाद — श्रीराम की दिव्यता को पहचानकर परशुराम का क्रोध शान्त होना
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
हिंदी अर्थ दिखाएँ
12. विवाह एवं विदाई
सीता-राम एवं चारों भाइयों का पावन विवाह, राजा जनक की भावपूर्ण विदाई एवं अवधपुरी में आनन्दमय वापसी — बालकाण्ड का मंगल उपसंहार
