Kand 3
अरण्यकाण्ड
Aranya Kand
अरण्यकाण्ड में वन जीवन की शांति से लेकर राक्षसी विघ्नों तक की कथा है, जिसका चरम बिंदु सीता-हरण और राम-वियोग है।
मुख्य विषय: वनविहार, राक्षस-वध, मारीच मृग-माया और सीता-हरण
पद 1अरण्यकाण्ड वन-जीवन
बन बिबिध भूषन धरि सीता।
राम लखन संग हरषि पुनीता॥
हिंदी अर्थ
वन में विविध प्राकृतिक शोभा के बीच सीता, राम और लक्ष्मण के साथ पवित्र आनंदमय जीवन जीती हैं।
पद 2अरण्यकाण्ड शूर्पणखा प्रसंग
देखि रूप रघुबीर मनोहर।
भई विकल अति काम बिभोरा॥
हिंदी अर्थ
राम के मनोहर रूप को देखकर शूर्पणखा मोहित और व्याकुल हो जाती है।
पद 3अरण्यकाण्ड मारीच प्रसंग
मृग माया बश भई जनकसुता।
राम पठाए लक्ष्मणहि ताता॥
हिंदी अर्थ
स्वर्ण-मृग की माया से सीता प्रभावित हुईं और राम के पीछे जाने पर लक्ष्मण को भी भेजा।
पद 4अरण्यकाण्ड सीता-हरण
रावन हरि लीन्ही जनकदुलारी।
रोवत रहे बनचारी नरनारी॥
हिंदी अर्थ
रावण जनकदुलारी सीता का हरण कर ले गया; वन के जीव-जंतु भी इस वियोग से व्याकुल हो उठे।
पद 5अरण्यकाण्ड जटायु प्रसंग
गिरा जटायू रुधिरु बहाई।
रामहि देखि कही दुखदाई॥
हिंदी अर्थ
जटायु घायल होकर गिर पड़े, और राम को देखकर उन्होंने सीता-हरण का दुखद समाचार बताया।
पद 6अरण्यकाण्ड भक्तिभाव
राम नाम बसि सकल बिहंगा।
जपत रहे बन तरु मृग गंगा॥
हिंदी अर्थ
राम-वियोग में भी प्रकृति का प्रत्येक कण राम-नाम का ही स्मरण करता प्रतीत होता है।
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