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🦡Panchatantra📖 4 min read

वफादार नेवला

The Loyal Mongoose

वफ़ादार नेवला बच्चे को साँप से बचाता है, लेकिन माँ जल्दबाज़ी में नेवले को मार देती है।

एक गाँव में एक ब्राह्मण परिवार रहता था। उनके घर में एक छोटा सा बच्चा था जो अभी पालने में सोता था। उसी घर में एक नेवला भी पाला हुआ था। नेवला बचपन से घर में रहता था और बच्चे का बहुत ध्यान रखता था।

ब्राह्मणी नेवले को बहुत चाहती थी, पर उसके मन में हमेशा एक डर भी रहता था, "नेवला आखिर जानवर है।"

एक दिन ब्राह्मणी को बाज़ार जाना था। उसने बच्चे को पालने में सुलाया, नेवला पास ही बैठा था। उसने सोचा, "जल्दी जाकर आ जाऊँगी।" और निकल पड़ी।

ब्राह्मणी के जाते ही एक काला भयंकर साँप कहीं से घर में घुस आया। वह फुफकारता हुआ बच्चे के पालने की तरफ़ बढ़ने लगा। नेवले ने साँप को देखा और तुरंत साँप पर कूद पड़ा।

भयंकर लड़ाई हुई। साँप फुफकार रहा था, नेवला अपने तेज़ दाँतों से उसे काट रहा था। अंत में नेवले ने साँप को मार गिराया।

नेवले का मुँह और पंजे खून से लाल हो गए। वह खुश था — उसने बच्चे को बचा लिया! नेवला गर्व से दरवाज़े की तरफ़ दौड़ा।

तभी ब्राह्मणी बाज़ार से लौटी। उसने दरवाज़े पर नेवले को खून से सना हुआ देखा। एक पल में उसके दिमाग़ में भयंकर विचार आया — "इसने मेरे बच्चे को मार डाला!" बिना सोचे-समझे, बिना अंदर जाकर देखे, उसने पानी से भरा भारी घड़ा नेवले पर दे मारा।

नेवला वहीं गिर पड़ा — मर गया।

ब्राह्मणी भागकर अंदर गई और देखा — बच्चा सुरक्षित सो रहा है। पालने के पास मरा हुआ साँप पड़ा है। उसे सब समझ आ गया — नेवले ने बच्चे को साँप से बचाया था और उसने इनाम में उसे मार डाला!

ब्राह्मणी ज़मीन पर बैठ गई और फूट-फूटकर रोई। "मैंने बिना सोचे अपने वफ़ादार नेवले को मार दिया! काश मैंने एक बार अंदर देख लिया होता!" पर अब पछताने से क्या होता?

इसीलिए कहते हैं — जल्दबाज़ी में कोई भी फैसला नहीं लेना चाहिए। पहले पूरी बात जानो, फिर कुछ करो।

🌟 कहानी की सीख

जल्दबाज़ी में लिया गया फैसला हमेशा पछतावा देता है।

Never act in haste. Think before you react, especially in anger.

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