माखन चोर कृष्ण
Little Krishna and the Butter Pot
नथकट कन्हैया चोरी-छिपे माखन खाते हैं और मैया यशोदा उन्हें पकड़ लेती हैं।
गोकुल गाँव में नंद बाबा और यशोदा मैया का एक प्यारा सा बेटा था — कन्हैया। कन्हैया की आँखें काजल लगी हुई बड़ी-बड़ी थीं और उनके गालों पर हमेशा माखन की सुगंध रहती थी। पूरे गोकुल में उनकी शरारतों के चर्चे थे।
एक दिन सुबह-सुबह यशोदा मैया ने ताज़ा दही से माखन निकाला और एक बड़ी हांडी में रखकर ऊँची कड़ी पर टाँग दिया। मैया ने सोचा, "आज तो कन्हैया का हाथ नहीं पहुँचेगा!" फिर वे दूसरे काम में लग गईं।
लेकिन कन्हैया तो कन्हैया थे! उन्होंने अपने सखाओं — सुदामा, मधुमंगल और श्रीदामा को बुलाया। "आओ दोस्तों, आज माखन बहुत ऊँचाई पर है, पर हमारी जुगत से कोई बच नहीं सकता!" कन्हैया ने कहा।
सबने मिलकर एक योजना बनाई। पहले एक ऊखल को घसीटकर हांडी के नीचे लाया। फिर उस पर एक पटरा रखा। कन्हैया ऊखल पर चढ़े, फिर सुदामा के कंधे पर पैर रखा और हांडी तक पहुँच गए। हांडी खोलते ही माखन की मीठी-मीठी खुशबू फैल गई।
कन्हैया ने दोनों हाथों से माखन निकालकर पहले सखाओं को खिलाया, फिर खुद मुँह भर-भर के खाने लगे। कुछ माखन बंदरों को भी दिया — बंदर खुशी से उछलने लगे। माखन उनके गालों पर, हाथों पर, कपड़ों पर — हर जगह लग गया।
तभी यशोदा मैया की नज़र पड़ी! "कन्हैया! फिर तू माखन चुरा रहा है!" मैया ने आवाज़ लगाई। सखा तो भाग गए, पर कन्हैया ने मासूमियत से कहा, "मैया, मैंने तो माखन नहीं खाया। ये तो बंदरों ने खाया!"
यशोदा मैया ने कहा, "अच्छा? तो तेरे मुँह पर ये माखन कैसे लगा?" कन्हैया ने जल्दी से हाथ से मुँह पोंछा, पर माखन और फैल गया। मैया को हँसी आ गई, पर उन्होंने डाँटने का नाटक किया।
मैया ने कन्हैया को पकड़कर ऊखल से बाँध दिया और बोलीं, "आज तुझे सज़ा मिलेगी!" पर कन्हैया की बड़ी-बड़ी आँखों में आँसू देखकर मैया का दिल पिघल गया। उन्होंने कन्हैया को गले लगा लिया और खुद अपने हाथ से माखन खिलाया।
गोपियाँ रोज़ शिकायत लेकर आतीं — "यशोदा, तेरा कन्हैया हमारे घर का माखन चुरा ले गया!" पर सबको पता था कि कन्हैया के बिना गोकुल अधूरा है। उनकी शरारतों में भी प्यार झलकता था, और उनके माखन चुराने में भी एक अलग ही मिठास थी।
🌟 कहानी की सीख
भगवान भी माँ के प्रेम के आगे नतमस्तक हो जाते हैं।
God loves those who are innocent and pure at heart.
