हनुमान जी की महाशक्ति
Hanuman Crosses the Ocean
हनुमान जी समुद्र लाँघकर लंका पहुँचते हैं, सीता माता को ढूँढते हैं और लंका जला देते हैं।
जब रावण ने सीता माता का अपहरण किया तो श्रीराम और लक्ष्मण उन्हें ढूँढते हुए किष्किंधा पहुँचे। वहाँ सुग्रीव की वानर सेना ने मदद का वचन दिया। पता चला कि सीता माता लंका में हैं — समुद्र के उस पार।
समुद्र सौ योजन चौड़ा था। कोई भी वानर इतना समुद्र लाँघने में समर्थ नहीं था। तब जामवंत ने हनुमान जी से कहा, "हनुमान! तुम पवनपुत्र हो, तुम्हारे अंदर अपार शक्ति है। बचपन में तुमने सूरज को पकड़ने की उड़ान भरी थी। याद करो अपनी शक्ति!"
हनुमान जी को अपनी शक्ति का स्मरण हुआ। उन्होंने "जय श्रीराम" का उद्घोष किया और पहाड़ की चोटी से छलाँग लगाई। उनका विशाल रूप आकाश में बादलों को चीरता हुआ आगे बढ़ा। रास्ते में सुरसा नामक राक्षसी ने मुँह फैलाकर रोकना चाहा — हनुमान जी ने चतुराई से बहुत छोटा रूप धरकर उसके मुँह में घुसे और तुरंत बाहर निकल आए।
लंका पहुँचकर हनुमान जी ने रात के अँधेरे में छोटा रूप धारण किया और पूरी लंका छान मारी। सोने के महल, रत्नजड़ित भवन — पर सीता माता कहीं नहीं मिलीं। अंत में अशोक वाटिका में उन्होंने सीता माता को देखा — दुबली, उदास, राक्षसियों से घिरी हुई, पर राम नाम का जाप करती हुई।
हनुमान जी ने चुपके से श्रीराम की अँगूठी सीता माता को दी। सीता माता की आँखों में आँसू आ गए — खुशी के आँसू। उन्होंने अपनी चूड़ामणि हनुमान जी को दी और कहा, "राम से कहना, मैं उनकी प्रतीक्षा कर रही हूँ।"
हनुमान जी ने जानबूझकर अशोक वाटिका उजाड़ दी ताकि रावण तक संदेश पहुँचे। रावण के सैनिकों ने उन्हें पकड़ लिया और रावण के दरबार में ले गए। रावण ने उनकी पूँछ में कपड़ा लपेटकर आग लगवा दी।
पर हनुमान जी तो हनुमान जी थे! वे बंधन तोड़कर छत पर कूदे और एक महल से दूसरे महल पर उछलते हुए अपनी जलती पूँछ से पूरी सोने की लंका में आग लगा दी। फिर समुद्र में पूँछ बुझाकर वे राम जी के पास लौट आए।
हनुमान जी ने कहा, "प्रभु, सीता माता सुरक्षित हैं और आपकी राह देख रही हैं।" यह सुनकर श्रीराम ने हनुमान जी को गले से लगा लिया।
🌟 कहानी की सीख
सच्ची भक्ति और साहस से कोई भी बाधा पार की जा सकती है।
When you have true devotion, even the impossible becomes possible.
