अर्जुन की एकाग्रता
Arjuna and the Eye of the Bird
गुरु द्रोणाचार्य अर्जुन की एकाग्रता की परीक्षा लेते हैं — अर्जुन को केवल चिड़िया की आँख दिखती है।
हस्तिनापुर में गुरु द्रोणाचार्य कौरवों और पांडवों को शस्त्र विद्या सिखाते थे। द्रोणाचार्य सबको समान रूप से पढ़ाते थे, पर उन्हें पता था कि अर्जुन में कुछ खास बात है।
अर्जुन हर रोज़ सबसे पहले उठता, सबसे ज़्यादा अभ्यास करता। जब सब सो जाते, तब भी अर्जुन अँधेरे में तीर चलाने का अभ्यास करता।
एक दिन गुरु द्रोणाचार्य ने सभी राजकुमारों की परीक्षा लेने का फैसला किया। उन्होंने एक पेड़ की ऊँची डाल पर एक लकड़ी की चिड़िया बाँधी। गुरु ने कहा, "आज तुम सबको इस चिड़िया की आँख में तीर मारना है। पर पहले मुझे बताओ — तुम्हें क्या दिखाई दे रहा है?"
सबसे पहले युधिष्ठिर को बुलाया। उन्होंने कहा, "गुरुदेव, मुझे पेड़ दिख रहा है, डालियाँ दिख रही हैं, पत्ते दिख रहे हैं, और चिड़िया भी दिख रही है।" गुरु ने कहा, "तीर नीचे रखो।"
फिर दुर्योधन आया। "मुझे बगीचा दिखता है, पेड़ दिखता है, चिड़िया दिखती है।" गुरु ने कहा, "तुम भी हटो।"
भीम ने कहा, "चिड़िया दिख रही है और बहुत भूख भी लग रही है!" सब हँसे, पर गुरु ने भीम को भी रोक दिया।
एक-एक करके सब राजकुमार आए — सबको और भी बहुत कुछ दिखता था।
अंत में अर्जुन की बारी आई। अर्जुन ने धनुष उठाया, तीर चढ़ाया और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया। गुरु ने पूछा, "अर्जुन, तुम्हें क्या दिखता है?"
अर्जुन ने कहा, "गुरुदेव, मुझे केवल चिड़िया की आँख दिखती है।"
"पेड़ नहीं दिखता?" — "नहीं।" "डाली नहीं दिखती?" — "नहीं।" "चिड़िया का शरीर?" — "नहीं गुरुदेव, केवल आँख।"
गुरु द्रोणाचार्य मुस्कुराए और बोले, "तीर छोड़ो!" अर्जुन ने तीर छोड़ा — सीधा चिड़िया की आँख में! गुरु ने गले लगाकर कहा, "तुम संसार के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बनोगे।" और अर्जुन सचमुच बने।
🌟 कहानी की सीख
एकाग्रता और ध्यान से ही लक्ष्य की प्राप्ति होती है।
Success comes to those who focus completely on their goal.
