Rashtriya Geet (राष्ट्रीय गीत)
वन्दे मातरम् (पूर्ण गीत) (Vande Mataram (Purna Geet))
रचयिता: बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय
मातृभूमि की महिमा का स्तवन; इसमें दुर्गा स्वरूप का भी वर्णन आता है।
[राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकृत अंश] वन्दे मातरम्! सुजलाम् सुफलाम् मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलाम् मातरम्। वन्दे मातरम्! शुभ्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्, फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्, सुखदां वरदां मातरम्। वन्दे मातरम्! कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले, कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले, अबला केन मा एत बले। बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं, रिपुदलवारिणीं मातरम्॥ वन्दे मातरम्! तुमि विद्या, तुमि धर्म, तुमि हृदि, तुमि मर्म, त्वं हि प्राणा: शरीरे। बाहुते तुमि मा शक्ति, हृदये तुमि मा भक्ति, तोमारई प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे॥ वन्दे मातरम्! त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी, कमला कमलदलविहारिणी, वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम् नमामि कमलां, अमलां अतुलां सुजलां सुफलां मातरम्॥ वन्दे मातरम्! श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां, धरणीं भरणीं मातरम्। वन्दे मातरम्!
