विट्ठल / पांडुरंग
जय विट्ठल जय विट्ठल
पंढरपुर के भगवान विट्ठल-पांडुरंग की यह आरती वारकरी संप्रदाय में सर्वाधिक प्रिय है।
इस आरती के बारे में
जय विट्ठल पंढरपुर के भगवान विट्ठल की आरती है जो वारकरी संत परंपरा का प्राण है और आषाढ़ी एकादशी पर लाखों भक्त पैदल यात्रा करते हैं।
पाठ का समय
आषाढ़ी एकादशी, कार्तिकी एकादशी, वारी यात्रा, पंढरपुर मंदिर में प्रतिदिन की पूजा
Hindi Lyrics (मूल पाठ)
जय विट्ठल जय विट्ठल, विट्ठल जय जय। पंढरपुर के राजा, पांडुरंग राय॥ जय विट्ठल जय विट्ठल॥ पुंडलीक के भक्ति में, आए पांडुरंग। कमर पर दोनों हाथ, खड़े विट्ठल रंग॥ जय विट्ठल जय विट्ठल॥ रखुमाई संग विराजत, इंद्रायणी तट पर। भीमा नदी के किनारे, दरशन मिले ठाकुर॥ जय विट्ठल जय विट्ठल॥ वारकरी भक्त आते, पैदल यात्रा करते। आषाढ़ कार्तिक मास में, सब वारी ले आते॥ जय विट्ठल जय विट्ठल॥ ज्ञानेश्वर तुकाराम, नामदेव भक्त तेरे। संत एकनाथ भजन से, हुए नयन सवेरे॥ जय विट्ठल जय विट्ठल॥
📖 अर्थ / भावार्थ
जय विट्ठल — पंढरपुर के ठाकुर विट्ठल की जय हो।
पुंडलीक के भक्ति में आए पांडुरंग — भक्त पुंडलीक की भक्ति से प्रसन्न होकर विट्ठल स्वयं उनके घर आए।
कमर पर दोनों हाथ — विट्ठल का यही अनोखा स्वरूप है — कमर पर हाथ रखे ईंट पर खड़े।
वारकरी भक्त पैदल यात्रा करते — वारकरी संप्रदाय के भक्त आषाढ़ और कार्तिक में पंढरपुर पैदल जाते हैं।