दत्तात्रेय / दत्त महाराज
जय जय दत्त दिगंबर
भगवान दत्तात्रेय की आरती जो ब्रह्मा-विष्णु-शिव के त्रिमूर्ति स्वरूप और परम गुरु के रूप में महाराष्ट्र-कर्नाटक में पूजित हैं।
इस आरती के बारे में
दत्तात्रेय की आरती ब्रह्मा-विष्णु-शिव के त्रिमूर्ति स्वरूप दत्त महाराज को समर्पित है जो परम गुरु के रूप में दक्षिण भारत और महाराष्ट्र में पूजित हैं।
पाठ का समय
दत्त जयंती (मार्गशीर्ष पूर्णिमा), दत्त मंदिरों में प्रतिदिन, गुरुपूर्णिमा, गुरुवार
Hindi Lyrics (मूल पाठ)
जय जय दत्त दिगंबर, दयाल त्रिमूर्ती। ब्रह्मा विष्णु शिव रूपा, गुरु की पूर्ण मूर्ती॥ जय जय दत्त दिगंबर॥ चार कुत्ते साथ में, औदुम्बर छाया। पीछे गाय सदा रहती, दत्त की माया॥ जय जय दत्त दिगंबर॥ गिरनार पर्वत पर, वास करते दत्त। महाराष्ट्र कर्नाटक में, पूजित हैं गुप्त॥ जय जय दत्त दिगंबर॥ त्रिशूल कमंडल धारी, शंख चक्र साथ। षट्दर्शन के ज्ञाता, सब गुरुओं के नाथ॥ जय जय दत्त दिगंबर॥ दत्त जयंती के दिन, भजन पूजन होता। जो दत्त का स्मरण करे, उसका भव-बंधन छूटता॥ जय जय दत्त दिगंबर॥
📖 अर्थ / भावार्थ
जय दत्त दिगंबर — दत्त का अर्थ है 'दिया गया' और दिगंबर का अर्थ है दिशाएं ही जिनका वस्त्र हैं।
ब्रह्मा-विष्णु-शिव रूपा — दत्तात्रेय में तीनों देवों का वास है।
चार कुत्ते साथ में — ये चारों वेदों के प्रतीक हैं।
औदुम्बर वृक्ष और गाय — ये दत्त के पसंदीदा वास स्थान हैं।