तुलसीदास रचित — रोग निवारण स्तोत्र

हनुमान बाहुक

शरीर की समस्त पीड़ा — बाहु, शिर, देह — के लिए हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त करें

📖 रचना की कथा

गोस्वामी तुलसीदास जी को वृद्धावस्था में बाहु-पीड़ा (arm pain) की भयंकर बीमारी हुई। असाध्य दर्द में उन्होंने हनुमान जी को पुकारा और यह "हनुमान बाहुक" लिखा। कहते हैं, पाठ करते-करते उनकी पीड़ा दूर हो गई। तब से यह स्तोत्र शारीरिक पीड़ा निवारण का सिद्ध उपाय बन गया।

हनुमान बाहुक — प्रमुख छंद

⚠️ यहाँ प्रमुख छंद दिए गए हैं। संपूर्ण 44 छंद वाला पाठ किसी प्रामाणिक पुस्तक या ऐप से पढ़ें।
॥ हनुमान बाहुक ॥
(गोस्वामी तुलसीदास रचित)

काम कोह कपट दंभ लोभ अतिमोह,
मोह गाढ़ निरावहि बिकलता ।
राम राम रटि रामभजि राम राम कहत,
सब दुख भागत निरमलता ॥ १ ॥

हनुमान महाबली राम के दूत,
जो आपदा निवारत हैं ।
बाहु-पीड़ा शिर-पीड़ा देह-पीड़ा,
पवनसुत हरत हैं ॥ २ ॥

तुलसीदास भयो बाहु-पीड़ित,
शरण लीनो हनुमान की ।
लंकापति-दलने राम-कार्य-कारी,
सुनो व्यथा भगवान की ॥ ३ ॥

बाहु पीर जब जब भई, हनुमान सुमिरयो नाम ।
तुलसी भयो निरोग तब, परम कृपा अभिराम ॥ ४ ॥

जो हनुमान सुमिरे नित, रोग दोष सब जाय ।
सकल विघ्न बाधा मिटे, मंगल होय सदाय ॥ ५ ॥

सियावर रामचंद्र की जय ।
पवनसुत हनुमान की जय ॥

इति हनुमान बाहुक सम्पूर्णम् ।
(पूर्ण पाठ: 44 छंद — मंगलवार को एकांत में पढ़ें)

🩺 किन रोगों में लाभकारी?

💪

बाहु-पीड़ा

हाथ, कंधे और भुजाओं का दर्द — तुलसीदास ने स्वयं इसी कारण यह स्तोत्र लिखा।

🧠

शिर-पीड़ा

सिरदर्द, माइग्रेन और मस्तिष्क रोग।

🦵

देह-पीड़ा

शरीर की समस्त पीड़ा — जोड़ दर्द, लकवा, गठिया।

🌡️

असाध्य रोग

जहाँ दवाइयाँ काम न करें — वहाँ हनुमान बाहुक का नियमित पाठ।

😰

मानसिक पीड़ा

अवसाद, चिंता और भय से मुक्ति — हनुमान जी की कृपा से।

👁️

नेत्र रोग

आँखों की कमजोरी और रोगों में भी लाभकारी।

🪔 पाठ विधि — मंगलवार

  1. 1मंगलवार प्रातः स्नान करके, पूर्व या उत्तर दिशा में बैठें।
  2. 2हनुमान जी की प्रतिमा के सामने लाल फूल और चमेली का तेल दीपक जलाएँ।
  3. 3पहले "श्री हनुमान चालीसा" का 1 पाठ करें।
  4. 4फिर हनुमान बाहुक का पाठ आरंभ करें — 44 छंद पूर्ण।
  5. 5पाठ के दौरान पीड़ित अंग पर हल्के से हाथ रखें और हनुमान जी का स्मरण करें।
  6. 6पाठ के बाद हनुमान जी को सिंदूर और लड्डू का भोग अर्पित करें।
  7. 7यह क्रम 21 या 40 मंगलवार तक करें।

⚠️ यह स्तोत्र आध्यात्मिक आस्था पर आधारित है। किसी भी शारीरिक बीमारी के लिए कृपया चिकित्सक से परामर्श लें। यह पाठ चिकित्सा का विकल्प नहीं है।

हनुमान बाहुक — संपूर्ण पाठ, दर्द निवारण और लाभ | वेदकोश | VedKosh