दुर्गा / काली
अम्बे तू है जगदम्बे काली
माँ दुर्गा की शक्तिशाली आरती जो उनकी उग्र और रक्षात्मक रूपों — जगदम्बे और काली — का आह्वान करती है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि की संध्या पूजा में विशेष रूप से गाई जाती है।
पाठ का समय
चैत्र नवरात्रि, शरद नवरात्रि, सायंकालीन पूजा
Hindi Lyrics (मूल पाठ)
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली। तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥ तेरे भक्त जनों पर माता भीर पड़ी है भारी। दानव दल पर टूट पड़ो माँ करके सिंह सवारी॥ सौ-सौ सिंहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली। दुष्टों को पल में संहारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥ माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता। पूत-कपूत सुने हैं पर ना माता सुनी कुमाता॥ सब पे करुणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली। दुखियों के दुखड़े निवारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥ नहीं माँगते धन और दौलत, ना चाँदी ना सोना। हम तो माँगें माँ तेरे मन में इक छोटा सा कोना॥ सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली। सतियों के सत को सँवारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली। तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥
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