दुर्गा / अम्बे गौरी
जय अम्बे गौरी
माँ दुर्गा को अम्बे गौरी रूप में समर्पित यह आरती नवरात्रि में सर्वाधिक गाई जाती है।
इस आरती के बारे में
जय अम्बे गौरी माँ दुर्गा की प्रसिद्ध आरती है जो नवरात्रि और शक्ति पूजा में सर्वत्र गाई जाती है।
पाठ का समय
नवरात्रि (चैत्र और शरद), सायंकालीन पूजा, शुक्रवार
Hindi Lyrics (मूल पाठ)
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दो नैना, चंद्रवदन नीको॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे। रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजे॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी। सुर-नर मुनि जन सेवत, तिनके दुखहारी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योति॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ शम्भु निशंक मन्नत, नन्दी महेश्वरी। नन्दी महेश्वरी माँ जी, नन्दी महेश्वरी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ दुर्गा चालीसा नित नित गावें। भवसागर से पार उतारें, जो कोई नर गावे॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥
📖 अर्थ / भावार्थ
जय अम्बे गौरी — हे गौरवर्णा माँ अम्बे, आपकी जय हो।
माँग सिंदूर विराजत — माथे पर सिंदूर की बिंदी सुशोभित है।
केहरि वाहन राजत — आप सिंह वाहन पर विराजमान हैं और हाथ में खड्ग और खप्पर धारण किए हुए हैं।
सुर-नर मुनि जन सेवत — देवता, मनुष्य और मुनि सभी आपकी सेवा करते हैं।