🙏 शनि चालीसा + आरती — शनिवार संध्या सेवा

आरती: शनि चालीसा से अलग — यह शनि की संध्या स्तुति है।

5-चरण शनिवार संध्या मंदिर सेवा

1

शनि अभिषेक

सरसों तेल धारा — "ॐ शं शनैश्चराय नमः" 108 बार।

2

माला अर्पण

काले फूलों की माला या बैंगनी फूल।

3

दीपक

सरसों तेल — 5 बत्ती दीपक। पश्चिम दिशा।

4

शनि चालीसा

40 चौपाइयाँ — धीरे पढ़ें। फिर दोहा।

5

शनि आरती

"जय जय श्री शनिदेव" — 3 बार आरती।

शनि आरती

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

श्याम अंग वक्र दृष्टि चतुर्भुज धारी।
नीलांबर धारी गृध्र वाहन असवारी॥

कृष्ण वाहन धनुष बाण सजाए सांई।
विश्वनाथ धनुर्धारी यही सब जन भाई॥

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।

आरती का अर्थ

"जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी"

शनि देव की जय — जो भक्तों का हित करते हैं।

"सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी"

सूर्य के पुत्र और छाया माता के प्रभु।

"श्याम अंग वक्र दृष्टि चतुर्भुज धारी"

श्याम वर्ण, टेढ़ी दृष्टि, चार भुजाधारी।

"नीलांबर धारी गृध्र वाहन असवारी"

नीले वस्त्र पहने, गिद्ध पर सवार।

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