🪐 शनि चालीसा — PDF के लिए सम्पूर्ण पाठ

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॥ श्री शनि चालीसा ॥

॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

॥ चौपाई ॥
श्याम अंग वक्र दृष्टि चाप। नील वसन धनुष शर जाप॥
गृध्र वाहन उग्र स्वभाव। सब ग्रहन में करें प्रभाव॥
सूर्य पुत्र छाया के नंदन। यम के अग्रज भ्राता वंदन॥
कर्म फलन के दाता न्यायी। जग में चर्चा तुम्हरी भाई॥
दशा महादशा में आते। सब प्राणिन को कर्म चखाते॥
जो शनि का ध्यान लगावे। संकट दुःख सब दूर हो जावे॥
तेल तिल अर्पण जो करते। शनि देव तुरंत प्रसन्न होते॥
काले वस्त्र पहन जो आवे। तुम्हरी कृपा वो नित पावे॥
लोहे का दीपक जलावे। शनि महाराज तुरत प्रसन्न होवे॥
उड़द दाल दान जो करे। तिनके पाप सकल टल जावे॥
हनुमत भक्त जो तेरे। शनि उन्हें कभी न छेड़े॥
रावण ने जब किया कैद। हनुमान ने किया तुम्हें रिहा॥
प्रसन्न होकर दिया वचन। भक्तन की करूँ नित रक्षण॥
जो शनि मंदिर को आवे। सात परिक्रमा लगावे॥
मन माँगी मुराद वो पावे। घर में सुख शांति भरावे॥
शनि जयंती पर जो पूजे। उसके जीवन में न दुःख ढूंढे॥
साढ़े साती में जो पढ़े। कठिन काल भी हल्का पड़े॥
अनुशासन और धैर्य सिखाते। तुम सबका कल्याण कराते॥
न्यायदेव तुम सबके प्यारे। कर्म से बड़ा नहीं कोई तुम्हारे॥
शनि चालीसा जो नित पढ़े। जीवन में उसके खुशियाँ बढ़े॥

॥ समापन दोहा ॥
जय जय श्री शनिदेव हे, करो कृपा अपार।
भक्तन के सब कष्ट हरो, दो शुभ जीवन धार॥

शनि चालीसा पाठ के 5 लाभ

1

साढ़े साती शांति

साढ़े साती और ढैया के कठिन काल में नियमित पाठ से राहत मिलती है।

2

कर्म दोष निवारण

पिछले जन्मों के कर्म दोषों का प्रभाव हल्का होता है।

3

न्याय और सफलता

शनि न्याय के देवता हैं — ईमानदारी से काम करने वालों पर विशेष कृपा।

4

व्यापार में वृद्धि

शनिवार पाठ से व्यापार में स्थिरता और दीर्घकालिक सफलता।

5

भय मुक्ति

शनि का भय दूर होता है — मन में शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है।

💡 शनि चालीसा का सम्पूर्ण हिंदी-अंग्रेजी द्विभाषीय संस्करण देखें: शनि चालीसा हिंदी-अंग्रेजी

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