Kṛṣṇas tu bhagavān svayam || (Bhāgavata Purāṇa 1.3.28)
크리슈나스 투 바가반 스바얌 || (바가바타 푸라나 1.3.28)
EN: Krishna is the Lord Himself (the original source, not an amsa or expansion).
वेदव्यास श्रीमद्भागवत महापुराण
निगम-कल्प-तरोर्गलितं फलम्
Nigama-kalpa-taror galitam phalam
"वैदिक-साहित्य रूपी कल्पवृक्ष का पका हुआ फल — शुकदेव के मुख से अमृत से सिंचित।"
— Bhagavatam 1.1.3 (Prathama Skanda)
18,000+
श्लोक
12
स्कन्ध
335
अध्याय
Vyasa
रचयिता
18 महापुराणों में शीर्षस्थ — भक्ति-मार्ग का सर्वोच्च ग्रन्थ। प्रह्लाद, ध्रुव, गजेन्द्र, वामन और कृष्ण की सम्पूर्ण कथा।
श्रीमद्भागवत महापुराण वेदव्यास द्वारा रचित 18 महापुराणों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। 18,000 से अधिक श्लोकों और 335 अध्यायों में 12 स्कन्धों के माध्यम से यह ग्रन्थ भगवान विष्णु/कृष्ण की महिमा और शुद्ध भक्ति-मार्ग का विवेचन करता है। परीक्षित और शुकदेव के संवाद-रूप में यह पूछे गए प्रश्न का उत्तर देता है: "मरणासन्न व्यक्ति का परम धर्म क्या है?"
वर्गीकरण
महापुराण, परमहंस संहिता
स्कन्ध
12 (प्रथम से द्वादश)
मूल भाषा
Sanskrit (Puranic)
केन्द्रीय देवता
भगवान विष्णु / कृष्ण
प्रथम से द्वादश — श्रीमद्भागवत का सम्पूर्ण विस्तार
श्रीमद्भागवत की वे कथाएँ जो सनातन-धर्म को जीवित रखती हैं
पाँच वर्षीय ध्रुव को सौतेली माँ ने पिता की गोद से दूर किया। माँ की सलाह — विष्णु की तपस्या करो। मधुवन में एक पैर पर खड़े होकर कठोर तप। विष्णु का प्रकट होना। ध्रुव-तारा — जिसके चारों ओर सभी तारे घूमते हैं।
हिरण्यकशिपु के अत्याचार। प्रह्लाद की अटल भक्ति। विष, पर्वत, हाथी, समुद्र, अग्नि — सब विफल। "स्तम्भ में है तेरा विष्णु?" — स्तम्भ से नरसिंह। सन्ध्याकाल, देहरी पर, नाखूनों से, जाँघ पर — प्रत्येक शर्त की पूर्ति।
गजेन्द्र — अभिमानी राजा का हाथी के रूप में पुनर्जन्म। एक हजार वर्ष का संघर्ष। थका हुआ हाथी — कमल उठाकर प्रार्थना: "हे आदिदेव!" — पूर्ण शरणागति। विष्णु का वैकुण्ठ से आगमन। गजेन्द्र-मोक्ष। गजेन्द्र-स्तुति — संस्कृत साहित्य में अद्वितीय।
महाबलि का त्रिभुवन-विजय। विष्णु — वामन-अवतार। तीन पग की भिक्षा। पहला पग — पृथ्वी, दूसरा — आकाश। तीसरे के लिए महाबलि ने सिर झुकाया। विष्णु ने सुतल-लोक दिया और स्वयं द्वारपाल बने।
देवकी-वसुदेव का कारावास। कंस द्वारा छह संतानों की हत्या। कृष्ण-जन्म — मध्यरात्रि, द्वार खुले, पहरेदार सोये। वसुदेव — यमुना पार, नन्द-यशोदा के यहाँ। कन्या का स्वयं को योगमाया घोषित करना।
वृन्दावन में इन्द्र-पूजा का विरोध। कृष्ण की गोवर्धन-पूजा। इन्द्र का कोप — सात दिन की अखण्ड वर्षा। कृष्ण ने गोवर्धन को कनिष्ठिका-उंगली पर उठाया। सात दिन — सबको छत्र-छाया। इन्द्र का समर्पण और कृष्ण-अभिषेक।
शरद-पूर्णिमा — कृष्ण की बाँसुरी। गोपियों का सब-कुछ छोड़कर आना। अहंकार आते ही कृष्ण का अन्तर्धान। गोपिका-गीत — दिव्य विरह-काव्य। पूर्ण शरणागति के बाद रास-नृत्य। एक-एक गोपी के साथ कृष्ण — माधुर्य-भक्ति का चरम।
श्रीमद्भागवत के चार दार्शनिक स्तम्भ
प्रह्लाद द्वारा 7वें स्कन्ध में उपदिष्ट: (1) श्रवण, (2) कीर्तन, (3) स्मरण, (4) पाद-सेवन, (5) अर्चन, (6) वन्दन, (7) दास्य, (8) सख्य, (9) आत्म-निवेदन। इनमें से कोई एक भी सिद्ध हो तो मोक्ष।
श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पाद-सेवनम् / अर्चनं वन्दनं दास्यं सख्यं आत्म-निवेदनम्
Shravanam kirtanam vishnoh smaranam pada-sevanam / Archanam vandanam dasyam sakhyam atma-nivedanam
— Saptama Skanda 5.23, Srimad Bhagavatam
भागवत (1.1.3): "वैदिक-साहित्य रूपी कल्पतरु का पका फल — शुकदेव के मुख से अमृत से सिंचित।" वेद = कल्पतरु; भागवत = उसका परिपक्व फल; शुक (तोते) के मुख से — द्विगुण मधुरता।
निगम-कल्प-तरोर्गलितं फलम् / शुक-मुखाद् अमृत-द्रव-संयुतम्
Nigama-kalpa-taror galitam phalam / Shuka-mukhad amrita-drava-samyutam
— Prathama Skanda 1.3, Srimad Bhagavatam
द्वादश स्कन्ध: कलि-युग में एकमात्र उपाय — हरि-नाम। "नास्त्येव, नास्त्येव, नास्त्येव" — तीन बार की दृढ़ घोषणा। तप, यज्ञ, ध्यान कठिन — केवल नाम-कीर्तन।
हरेर् नाम हरेर् नाम हरेर् नामैव केवलम् / कलौ नास्त्येव नास्त्येव नास्त्येव गतिर् अन्यथा
Harer nama harer nama harer namaiva kevalam / Kalau nasty eva nasty eva nasty eva gatir anyatha
— Dvadasha Skanda, Srimad Bhagavatam
परीक्षित — 7 दिन में मृत्यु निश्चित। भागवत-श्रवण का उपयोग। मृत्यु के समय विष्णु-धाम की प्राप्ति। उत्तम मृत्यु = हरि-कथा-श्रवण में मृत्यु। भागवत-श्रवण = सर्व-पाप-नाश।
तन्-नाम-ग्रहण-स्मरण-कीर्तन... सर्व-पाप-प्रशमनम्
Tan-nama-grahana-smarana-keertana... sarva-papa-prashamanam
— Dvadasha Skanda 12.6, Srimad Bhagavatam
शिव पुराण, महाभारत और भजन — आगे पढ़ें
Srimad Bhagavatam (Bhagavata Purana) — The Supreme Vaishnava Purana
슈리마드 바가바탐(바가바타 푸라나)은 산타나 다르마의 18대 마하푸라나 중 가장 사랑받는 텍스트로, 18,000구의 산스크리트 슐로카로 비슈누의 24개 화신(특히 크리슈나)의 이야기를 담고 있습니다. 비야사가 편찬했고 그의 아들 슈카데바 고스와미가 파리크시트 왕에게 7일 동안 들려준 형식입니다. 12 스칸다(부)로 구성되며, 10번째 스칸다(크리슈나의 일생)가 가장 유명합니다. 박티 요가의 최고 경전으로 차이타니야와 발라브하차리야 같은 박티 성자들의 영감의 원천입니다.
Kṛṣṇas tu bhagavān svayam || (Bhāgavata Purāṇa 1.3.28)
크리슈나스 투 바가반 스바얌 || (바가바타 푸라나 1.3.28)
EN: Krishna is the Lord Himself (the original source, not an amsa or expansion).
The Twelve Skandhas
1-2 스칸다 — 바가바타의 영광과 우주 창조. 3 스칸다 — 카필라의 상키야. 4 스칸다 — 두루바와 프리투의 이야기. 5 스칸다 — 우주 지리. 6 스칸다 — 아자미라 이야기. 7 스칸다 — 프라흐라다 박티. 8 스칸다 — 사무드라 만탄. 9 스칸다 — 라마야나 요약. 10 스칸다 — 크리슈나 일생 (가장 사랑받는 부분). 11 스칸다 — 우다바 기타. 12 스칸다 — 칼리 유가 예언과 결말.
Twenty-Four Avatars of Vishnu
바가바타 1.3에 24개 화신이 열거됩니다: 4 쿠마라스·바라하·나라다·나라-나라야나·카필라·다타트레야·야즈냐·리샤바·프리투·마츠야·쿠르마·단반타리·모히니·나라심하·바마나·파라슈라마·비야사·라마·크리슈나·발라라마·붓다·칼키 등. 10대 주요 화신(다샤바타라)이 가장 유명합니다.
Tenth Skandha — Krishna's Lila
고쿨라·브린다반에서의 크리슈나 어린 시절·고피들과의 라사 릴라·푸타나 살해·고바르단 들어올리기·쿠루크셰트라 전쟁의 길잡이까지. 박티 전통에서는 이 부분이 산타나 다르마 전체의 정수로 여겨집니다.
Reading Path for Korean Devotees
입문: 10 스칸다의 크리슈나 어린 시절(아디 릴라). 박티 수행: 매일 '하레 크리슈나, 하레 라마' 마하 만트라 16라운드(108×16 = 1,728회). 단식일: 에카다시(월 2회 — 바가바타 독송에 가장 상서로움). 7일 사프타하 의식이 전통입니다.
출처: 슈리마드 바가바탐 — 12 스칸다, 18,000 슐로카; 비야사 편찬, 슈카데바 고스와미 구술
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