रावण-रचित — शैव-स्तोत्र

शिव तांडव स्तोत्रम्
सम्पूर्ण अर्थ और महिमा

जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले

Jatā-ṭavī-galaj-jala-pravāha-pāvita-sthale

"जटारूपी वन से प्रवाहित गंगाजल से पवित्र स्थान में..." — पहला श्लोक

17

श्लोक

रावण

रचयिता

ताण्डव

विषय

उत्तर-रामायण

स्रोत

शिव तांडव स्तोत्रम् क्या है?

शिव तांडव स्तोत्रम् लंकाधिपति रावण द्वारा रचित 17 श्लोकों का एक असाधारण स्तोत्र है, जो शिव के महाताण्डव नृत्य का वर्णन करता है। प्रत्येक श्लोक लम्बे संस्कृत समासों की एक झरना है — जो स्वयं में ताण्डव की लय को पुनः-सृष्टि करती है। यह स्तोत्र शैव परम्परा में सर्वाधिक शक्तिशाली और लोकप्रिय स्तुतियों में से एक है।

रचयिता

रावण (लंकेश्वर)

श्लोक

17 (+1 phala-shruti)

देव

भगवान शिव (महादेव)

पाठ-काल

सोमवार, महाशिवरात्रि, प्रातः

पृष्ठभूमि और महत्त्व

रावण, ताण्डव और शैव-दर्शन

रावण — शत्रु से पहले भक्त

अधिकांश रावण को रामायण का खलनायक जानते हैं। परन्तु वह वेद-पारंगत, महावीणा-वादक और शिव का परम भक्त था। उत्तर-रामायण में: रावण ने कैलाश उठाने का प्रयास किया — शिव ने अँगूठे से दबाया। रावण ने तांडव स्तोत्र गाया — शिव प्रसन्न हुए और चन्द्रहास तलवार दी। भक्ति, नैतिकता से अधिक, शिव का मापदण्ड है।

शिव का ताण्डव — सृष्टि-संहार-नृत्य

ताण्डव केवल नृत्य नहीं — ब्रह्माण्ड की लय है। शिव दो नृत्य करते हैं: ताण्डव (श्मशान में, विनाश-संबद्ध) और लास्य (पार्वती के साथ)। नटराज प्रतिमा: एक हाथ में विनाश की अग्नि, दूसरे में सृष्टि का डमरू, एक पैर अपस्मार (अज्ञान) पर, दूसरा मोक्ष की ओर।

पञ्चाक्षर — पाँच अक्षरों का सार

ओम नमः शिवाय — पञ्चाक्षर मंत्र (ना-मः-शि-वा-य)। अंतिम श्लोक में मोक्ष-मंत्र के रूप में। पाँच अक्षर = पाँच तत्त्व: न = पृथ्वी, म = जल, शि = अग्नि, व = वायु, य = आकाश। ब्रह्माण्ड का पूर्ण चित्र।

रावण की स्तुति क्यों मायने रखती है

शिव का सर्वोत्तम स्तोत्र ब्रह्मा, विष्णु या ऋषि ने नहीं — एक राक्षस-राजा ने रचा। यह शैव-दर्शन का मूल: शिव किसी का भी भाव स्वीकार करते हैं। रावण की वैदिक विद्वत्ता, संस्कृत-दक्षता और तीव्र भक्ति से यह स्तोत्र अपने समास-समूहों में ताण्डव की लय ही बन जाता है।

17 श्लोक — अर्थ सहित

संस्कृत, IAST और अंग्रेज़ी अर्थ

1

Jatatavigalajjala pravahapavitasthale

jatā-ṭavī-galaj-jala-pravāha-pāvita-sthale

शिव की जटाओं की झाड़ी से गंगा का जल प्रवाहित होकर स्थल को पवित्र करता है। गले में वासुकि नाग की माला — इस अलौकिक सौन्दर्य का वर्णन रावण करता है।

2

Galat-phala-prabhava-vrinda-vandita-sri-ganesha

galat-phala-prabhāva-vṛnda-vanditā śrī-gaṇeśa

फलों के रस की धाराएँ गणेश की वन्दना करती हैं। शिव के मस्तक पर अर्धचन्द्र अन्धकार में दीपक-सा चमकता है।

3

Dhara dhara samindra vallari bhushita-skandha

dharā-dharendra-vallari-bhūṣita-skandha

पर्वतराज-तनया पार्वती शिव के कन्धे पर लता की तरह। व्याघ्रचर्म, भस्म-लेपन — ब्रह्माण्ड के स्वामी का परन्तु वैराग्य।

4

Kalas thalah kala bhasita bhujanga

kalā-ṭhālī-bhūṣita-bhujaṅga-rāja-nirmita

मुण्डमाला और वासुकि का यज्ञोपवीत — मृत्यु के प्रतीक शिव के आभूषण बन जाते हैं। भय मुक्ति का साधन बनता है।

5

Praphulla nila pankaja prapancha kalimba chaya

praphulla-nīla-paṅkaja-prapañca-kālimba-cchāya

नीलकण्ठ — समुद्र-मन्थन में हलाहल पान से कण्ठ नीला। जो विष किसी अन्य को मारता, वही शिव का आभूषण बन गया।

6

Sphurat-karana-nitamba-kunda-mandita-sundaram

sphurad-varuṇa-nitamba-kunda-maṇḍita-sundaram

ताण्डव का आरम्भ — शिव का नृत्य, कटि में घुंघरू और व्याघ्रचर्म लहराते हैं। उनके पैरों की ताल से धरती थरथराती है।

7

Javadvipana durvipana dugdha dugdha dandanaha

javā-dvipa-na-durvi-pā-na-dugdhā-dugdha-daṇḍanāha

काल का विष और मृत्यु का भय शिव के सामने नतमस्तक हैं। महाकाल — काल और मृत्यु से परे।

8

Sataghni nishkala muda muda muda

śatāghni-nishkala-mudā-mudā-mudā

"मुदा मुदा मुदा" — आनन्द, आनन्द, आनन्द। रावण का भाव काव्य-संरचना को तोड़कर भक्ति की पराकाष्ठा पर पहुँचता है।

9

Kratau supeshalantarae kratavyasundaram

kratau-supeśalāntare-kratavya-sundaram

शिव सभी यज्ञों के स्वामी हैं। उनका रूप मोक्ष के साधकों के ध्यान का परम सुन्दर विषय है।

10

Drikul bhuta chandana sthale khagadhipa

dṛk-kūl-bhūta-candana-sthale-khagādhipa

शिव के शरीर पर चन्दन, गरुड़ — ब्रह्मा-विष्णु-महेश की एकता का दर्शन।

11

Drishadvichittra talpayor bhujau sira silpa

dṛṣad-vicitra-talpayorbhujāṃ śiras-śilpa

ब्रह्माण्ड शिव का नृत्य-मंच है। पर्वत उनकी चरण-पीठिका, आकाश उनका मंच।

12

Savana parishkritam suraasanaani

savāna-pariṣkṛtaṃ surāsanāni

ब्रह्मा-विष्णु-इन्द्र सभी शिव के ताण्डव के सामने नतमस्तक। शैव-सिद्धान्त में शिव की सर्वोच्चता।

13

Phalendu shekharam kripa nidhanam

phaleṇḍu-śekharam-kṛpā-nidhānam

चन्द्रशेखर — मस्तक पर चन्द्रमा। भयावह रूप होने पर भी वे करुणा के सागर, ब्रह्माण्ड के करुण पिता।

14

Mano vinoda madbhutam bibirsha bhushanam

mano-vinoda-madhutam-bibhrata-bhūṣaṇam

रावण का मन विस्मय से भर उठता है। शिव का वर्णित सौन्दर्य उनके बुद्धिमान मस्तिष्क को बच्चे की तरह आनन्दित करता है।

15

Suvarna mandira kalyana suraakhyam

suvarṇa-mandira-kalyāṇa-surākhyam

शिव का निवास कैलाश — स्वर्ण-मन्दिर, परम मंगलधाम। रावण इतना भक्त था कि कैलाश को लंका ले जाना चाहता था।

16

Vibhakta trinay devam vishva karan meva cha

vibhakta-trinetraṃ devam-viśva-kāraṇam-eva-ca

त्रिनयन — ज्ञान का तीसरा नेत्र जो अज्ञान को भस्म करता है। कामदेव का दाहक। ब्रह्माण्ड का परम कारण।

17

Imam hi nityam eva muktim idham

imaṃ hi nityam-eva-muktim-idham

फलश्रुति: जो प्रतिदिन इस स्तोत्र का पाठ करे, वह सभी बन्धनों से मुक्त होकर महादेव की कृपा से कैलाश को प्राप्त करेगा।

🕉️ पाठ-विधि और लाभ

समय

सोमवार प्रातःकाल, महाशिवरात्रि, सावन माह में प्रतिदिन

पाठ-संख्या

1 बार, 3 बार, या 11 बार — श्रद्धानुसार

विशेष लाभ

भय-नाश, आत्मविश्वास, शत्रु-बाधा-निवारण, शिव-कृपा

सावधानी

रावण-रचित होने से कुछ वैष्णव इसे वर्जित मानते हैं — शैव परम्परा में पूर्णतः मान्य

अन्य शिव-स्तोत्र और मंत्र भी खोजें

शिव मंत्र →शिव पुराण सारांश →सभी स्तोत्र →

시바 탄다바 스토트람 — 라바나의 시바 찬가

Shiva Tandava Stotram — Ravana's Hymn to Shiva

이 스토트람은 라바나가 카일라사 산 아래 깔렸을 때 시바 신에게 즉흥적으로 바친 헌신의 찬가입니다. 17개의 시구는 시바의 우주적 탄다바 춤, 강가 강을 담은 엉킨 머리카락, 마하칼라(대시간의 신)로서의 모습을 생생하게 묘사합니다. 이 스토트람을 독송하면 용기가 생기고 두려움이 사라지며, 가장 강력한 샤이바 찬가 중 하나로 여겨집니다.

Jaṭāṭavī-galajjala-pravāha-pāvita-sthale, Galé-valambya-lambitāṁ bhujaṅga-tuṅga-mālikām | Damaḍ-damaḍ-damaḍ-damanninādavaḍḍamarvayaṁ, Cakāra caṇḍa-tāṇḍavaṁ tanotu naḥ Śivaḥ Śivam ||

자타타비 갈랏잘라 프라바하 파비타 스탈레, 갈레 발람비야 람비탐 부장가 퉁가 말리캄 | 다맏 다맏 다맏 다만닌나다바따마르바얌, 차카라 찬다 탄다밤 타노투 나 시바 시밤 ||

EN: May Lord Shiva — whose neck is consecrated by the flowing waters from his matted hair-forest, who wears tall snakes as garlands, whose damaru drum sounds 'damat-damat' — bestow auspiciousness upon us through his fierce Tandava dance.

Karāla-bhāla-paṭṭikā-dhagad-dhagad-dhagaj-jvalad, Dhanañjayāhutīkṛta-pracaṇḍa-pañcasāyake | Dharādharendra-nandinī-kucāgra-citra-patrakaprakalpana-eka-śilpini, Tribhocane ratir mama ||

카랄라 발라 팟티카 다갇 다갇 다갇 즈발랏, 다난자야후티크리타 프라찬다 판차사야케 | 다라다렌드라 난디니 쿠차그라 치트라 파트라카 프라칼파나 에카 실피니, 트리부차네 라티르 마마 ||

EN: May my devotion grow toward the three-eyed Lord whose forehead-band blazes with the fire that consumed Kamadeva (the god of love); whose artistry alone paints the patterns on Parvati's breast — daughter of the Mountain King.

Idam-hi nityam-evamukta-muttamottamaṁ stavaṁ, Paṭhan-smaran-bruvan-naro viśuddhim-eti santatam | Hare gurau subhaktimāśu yāti nānyathā gatiṁ, Vimohanaṁ hi dehinaṁ Suśaṅkarasya cintanam ||

이담 히 니티얌 에밤욱타 뭇타못타맘 스타밤, 파탄 스마란 브루반 나로 비숟딤 에티 산타탐 | 하레 구라우 수박티마수 야티 난야타 가팀, 비모하남 히 데히남 수상카라스야 친타남 ||

EN: One who reads, remembers, or recites this supreme hymn daily attains lasting purity. He swiftly attains pure devotion to Lord Hara (Shiva) and the Guru — there is no other path. Indeed, contemplating Lord Shankara dispels delusion in embodied beings.

탄다바 — 우주의 춤

Tandava — The Cosmic Dance

탄다바는 시바가 추는 우주적 파괴와 창조의 춤입니다. 이 춤을 통해 우주는 매 순간 해체되고 다시 태어납니다. 라바나는 카일라사 산 아래 깔린 채 이 춤의 위엄을 노래했습니다.

라바나 — 시바의 위대한 신자

Ravana — Shiva's Greatest Devotee

라마야나의 적대자로 알려진 라바나는 사실 시바에게 가장 헌신적인 신자였습니다. 그는 자신의 목을 잘라 비나(악기)의 줄로 사용하여 시바를 찬양했다고 전해집니다.

마하칼라 — 시간을 초월한 자

Mahakala — Lord of Time

시바는 마하칼라, 즉 '위대한 시간'으로 불립니다. 시간 자체가 그 앞에서 절합니다. 카시(바라나시)의 마하칼레쉬와르는 그의 가장 신성한 거처 중 하나입니다.

독송의 영적 효과

Spiritual Benefits of Recitation

이 스토트람을 매일 독송하면 두려움이 사라지고 용기가 생기며, 카르마가 정화된다고 전해집니다. 마하 시바라트리 밤에 독송하는 것이 특히 상서롭다고 여겨집니다.

옴 나마 시바야 만트라 보기마하 시바라트리 축제

출처: 시바 푸라나, 라마야나 우타라 칸다 — 라바나의 카일라사 사건

🙏 영적 여정을 계속하세요

베드코시(VedKosh)에서 관련 힌두 지혜, 매일의 안내, AI 기반 답변을 찾아보세요.

판창운세VedAI축제만트라더 보기

🚀 탐색 — VedKosh

🕉️ VedAI🪔 Aarti🎵 Bhajan📿 Chalisa🕉️ 만트라📖 기타🐒 순다르 칸드

🔗 빠른 링크:

🛕 축제🎯 퀴즈 운세🕉️ VedAI🪐 출생 차트