वेंकटेश / बालाजी / श्रीनिवास
जय जय श्री वेंकटेशा
तिरुपति बालाजी भगवान वेंकटेशा की यह आरती विश्व के सबसे अमीर और सर्वाधिक दर्शनार्थी मंदिर की आराधना है।
इस आरती के बारे में
तिरुपति बालाजी भगवान वेंकटेशा की आरती विश्व के सबसे अमीर हिंदू मंदिर को समर्पित है जहाँ प्रतिदिन लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
पाठ का समय
तिरुपति में प्रतिदिन; ब्रह्मोत्सवम और वैकुंठ एकादशी पर भी; सर्वत्र बालाजी मंदिरों में शनिवार को
Hindi Lyrics (मूल पाठ)
जय जय श्री वेंकटेशा, लक्ष्मी नाथ हरेशा। तिरुपति बालाजी, सब जग के सुखदेशा॥ जय जय श्री वेंकटेशा॥ सात पहाड़ों पर विराजे, तिरुमला में धाम। श्रीनिवास वेंकटेशा, करते सबका काम॥ जय जय श्री वेंकटेशा॥ श्री महालक्ष्मी संग, भूदेवी के साथ। पद्मावती के वर, शोभे तिरुपति नाथ॥ जय जय श्री वेंकटेशा॥ गोविंद गोविंद बोलो, भज बालाजी नाम। सात जन्मों के पाप, जाते पलभर में काम॥ जय जय श्री वेंकटेशा॥ केश दान कर भक्त, मनोरथ पाते सब। बालाजी के दर से कोई, खाली नहीं गए कभी॥ जय जय श्री वेंकटेशा॥
📖 अर्थ / भावार्थ
सात पहाड़ों पर विराजे — तिरुमला सात पहाड़ियों पर स्थित है जिन्हें सप्तगिरि कहते हैं।
श्रीनिवास — वेंकटेशा का एक और नाम श्रीनिवास है अर्थात श्री (लक्ष्मी) के निवास।
गोविंद गोविंद बोलो — सात जन्मों के पापों को नाश करने वाला नाम।
केश दान — भक्त अपने बाल चढ़ाकर अहंकार का त्याग करते हैं।