सत्यनारायण / विष्णु
श्री सत्यनारायण जी की आरती
भगवान सत्यनारायण की यह आरती सत्यनारायण पूजा के समापन पर गाई जाती है और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रसिद्ध है।
इस आरती के बारे में
सत्यनारायण जी की आरती उनकी पूजा के समापन का अनिवार्य हिस्सा है जिसे गृहस्थ जीवन में मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु किया जाता है।
पाठ का समय
सत्यनारायण पूजा (पूर्णिमा, शुभ अवसर, गृह प्रवेश, विवाह समारोह)
Hindi Lyrics (मूल पाठ)
जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जन-पातक हरणा॥ जय लक्ष्मी रमणा॥ रत्नाकर मंथन, त्रिभुवन-मोहन। राज शेष शयना, जय जय लक्ष्मी रमणा॥ जय लक्ष्मी रमणा॥ धर्म अर्थ काम मोक्ष, दातार जगपाला। ऋद्धि सिद्धि मंगलदाता, सुखदाता दयाला॥ जय लक्ष्मी रमणा॥ पाप कर्म सों पीड़ित, अति दुखदायक। भव से तारण कारण, जय जय जगनायक॥ जय लक्ष्मी रमणा॥ श्री लक्ष्मी रमणा, जय जय लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जन-पातक हरणा॥ जय लक्ष्मी रमणा॥