जगन्नाथ / दारुब्रह्म
जय जगन्नाथ स्वामी
भगवान जगन्नाथ की आरती जो पुरी धाम में अपने अद्भुत काष्ठ स्वरूप में विराजमान हैं और चार धाम में से एक हैं।
इस आरती के बारे में
जगन्नाथ स्वामी की आरती पुरी धाम के दारुब्रह्म जगन्नाथ को समर्पित है जिनकी वार्षिक रथ यात्रा में लाखों भक्त भाग लेते हैं।
पाठ का समय
रथ यात्रा (आषाढ़ शुक्ल द्वितीया), स्नान पूर्णिमा, नवकलेवर, पुरी जगन्नाथ मंदिर में प्रतिदिन
Hindi Lyrics (मूल पाठ)
जय जगन्नाथ स्वामी, जय जगन्नाथ। बलभद्र सुभद्रा सहित, नमन करें हाथ॥ जय जगन्नाथ स्वामी॥ पुरी के जगदीश, दारुब्रह्म स्वरूप। बड़े भाई बलदेव संग, दिव्य रूप अनूप॥ जय जगन्नाथ स्वामी॥ रथ यात्रा के अवसर, निकलें तीनों रथ। नंदीघोष गरुड़ध्वज ताल-ध्वज, भक्तों का पथ॥ जय जगन्नाथ स्वामी॥ महाप्रसाद माँगते, सब नर नारी। जगन्नाथ के दर्शन से, हो जाय फल भारी॥ जय जगन्नाथ स्वामी॥ पुरी की सुभद्रा रानी, नीलाद्री में वास। जगन्नाथ-बलभद्र-सुभद्रा, तीनों का प्रकाश॥ जय जगन्नाथ स्वामी॥
📖 अर्थ / भावार्थ
दारुब्रह्म स्वरूप — जगन्नाथ नीम के काष्ठ (दारु) से बने हैं जो ब्रह्म का अवतरण हैं।
रथ यात्रा के तीनों रथ — जगन्नाथ का नंदीघोष, बलभद्र का तालध्वज, सुभद्रा का दर्पदलन।
महाप्रसाद — पुरी का महाप्रसाद सभी जातियों के भक्त एक साथ ग्रहण करते हैं।