8 श्लोकसंपूर्ण पाठ

☀️ सूर्य अष्टकम् — 8 दिव्य श्लोक, अर्थ और लाभ

सूर्य अष्टकम् — सूर्य देव के 8 रूपों की स्तुति। दरिद्रता, नेत्र रोग और अहंकार दोष का नाश। रविवार को पाठ से अक्षय लाभ।

🕉️ सूर्य अष्टकम् — संपूर्ण पाठ

1
आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने ।
जन्मान्तरसहस्रेषु दारिद्र्यं नोपजायते ॥
💡 जो प्रतिदिन सूर्य को नमस्कार करते हैं, उनके हजार जन्मों तक दरिद्रता नहीं आती।
2
एनस्विनां तु सर्वेषां एनोनाशकरः सदा ।
सुखदः सौभाग्यदश्च सूर्योऽयं तेजसांपतिः ॥
💡 पापियों के पाप नष्ट करने वाले, सुख और सौभाग्य देने वाले — सूर्य तेज के स्वामी हैं।
3
रथसप्तम्यां यः पूज्य सूर्यं भक्त्या नरोत्तमः ।
भास्करस्य प्रसादेन मोक्षमाप्नोति निश्चितम् ॥
💡 रथ सप्तमी पर जो श्रेष्ठ पुरुष भक्ति से सूर्य की पूजा करता है, भास्कर की कृपा से वह निश्चित रूप से मोक्ष पाता है।
4
विकर्तनो विवस्वांश्च मार्तण्डो भास्करो रविः ।
लोकप्रकाशकः श्रीमान् लोकचक्षुर्महेश्वरः ॥
💡 विकर्तन, विवस्वान, मार्तण्ड, भास्कर, रवि — श्रीमान, लोक-प्रकाशक, लोक के नेत्र, महेश्वर।
5
लोकसाक्षी त्रिलोकेशो कर्ताहर्ता च सर्वदा ।
व्याधीनां हरणः श्रीमान् सर्वकल्याणकारकः ॥
💡 तीनों लोकों के साक्षी, कर्ता-हर्ता, रोगों के नाशक — सर्वकल्याणकारी श्रीमान।
6
उपस्थाय तु सूर्यं यः स्तोत्रमेतत्पठेन्नरः ।
आरोग्यमखिलं तस्य लभते नात्र संशयः ॥
💡 जो मनुष्य सूर्य की उपासना करके यह स्तोत्र पढ़ता है, उसे सम्पूर्ण आरोग्य मिलता है — इसमें कोई संदेह नहीं।
7
यश्च राजाभिषेकस्य वांछायां पठतेऽनिशम् ।
राजलक्ष्मीमवाप्नोति श्री विष्णोः प्रसादतः ॥
💡 जो राजपद की इच्छा से रात-दिन पाठ करता है, विष्णु की कृपा से राजलक्ष्मी प्राप्त होती है।
8
सर्वपापहरं पुण्यं चिन्तितार्थप्रदायकम् ।
मोक्षदं सर्वदुःखघ्नं सूर्यस्तोत्रमिदं सदा ॥
💡 यह सूर्य स्तोत्र सदा सर्वपाप नाशक, मनोकामना पूर्ण करने वाला, दुःखों का नाश करने वाला और मोक्ष देने वाला है।

🌟 प्रमुख लाभ

💰
दरिद्रता नाश
प्रथम श्लोक — हजार जन्मों तक दरिद्रता नहीं आती
👑
यश और कीर्ति
सप्तम श्लोक — राजलक्ष्मी की प्राप्ति
👁️
नेत्र रोग मुक्ति
षष्ठ श्लोक — सम्पूर्ण आरोग्य, विशेषकर दृष्टि
पाप विनाश
अष्टम श्लोक — सभी पापों का नाश

✅ पाठ चेकलिस्ट

सूर्य अष्टकम् पाठ विधि

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  • रविवार सूर्योदय के समय पाठ आरंभ करें
    पूर्व दिशा में मुख करके
  • आठों श्लोकों का पाठ करें, फिर अर्घ्य दें
  • 8 रविवार लगातार पाठ करें — मनोकामना पूर्ण होती है
  • नेत्र रोग में प्रतिदिन पाठ करें
    विशेष रूप से षष्ठ श्लोक
  • पाठ के बाद लाल फूल सूर्य को अर्पित करें
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