बजरंग बाण — नियम, सावधानियाँ और संपूर्ण पाठ

बजरंग बाण — एक उग्र प्रार्थना
हनुमान चालीसा जहाँ एक मधुर भक्ति-स्तुति है, वहीं बजरंग बाण एक "उग्र" (अत्यंत शक्तिशाली) प्रार्थना है। यह संकट, शत्रु-पीड़ा और भय के समय पढ़ी जाती है। इसके नियमों का पालन अनिवार्य है।

📋 अनिवार्य नियम

पाठ एक ही बैठक में पूरा करें — बीच में न रोकें।
पाठ से पहले स्नान और स्वच्छ वस्त्र अनिवार्य।
घी का दीपक जलाएँ और लाल फूल अर्पित करें।
मंगलवार या शनिवार, ब्रह्म मुहूर्त में पाठ सर्वोत्तम।
3 / 21 / 40 दिन के विधान में एक दिन भी न छूटे।
⚠️मासिक धर्म के दौरान पाठ न करें।
⚠️मांस-मदिरा के सेवन वाले दिन पाठ वर्जित।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या महिलाएँ बजरंग बाण पढ़ सकती हैं?

विद्वानों में मतभेद है। अधिकांश का मत है कि महिलाएँ श्रद्धापूर्वक पाठ कर सकती हैं — हनुमान जी सबकी रक्षा करते हैं। हालाँकि, मासिक धर्म के दौरान पाठ से बचें।

क्या बीच में पाठ रोक सकते हैं?

नहीं। बजरंग बाण एक ही बैठक में पूरा करना आवश्यक है। अगर अपरिहार्य कारण हो, तो "ॐ हनुमते नमः" का 11 बार जाप करके पाठ फिर से शुरू करें।

3 दिन का विधान क्या है?

गंभीर संकट में 3 लगातार दिन (या 21 या 40 दिन) पाठ करने का विधान है। यदि किसी दिन छूट जाए, तो शुरू से गिनती करें।

सबसे अच्छा समय कौन सा है?

मंगलवार या शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से 1.5 घंटे पहले) सर्वोत्तम है। सायंकाल में दीप जलाकर पाठ भी प्रभावशाली है।

बजरंग बाण और हनुमान चालीसा में क्या अंतर है?

हनुमान चालीसा एक मधुर स्तुति है — कोई भी कभी भी पढ़ सकता है। बजरंग बाण एक "उग्र" (तीव्र) प्रार्थना है — यह संकट और शत्रु-पीड़ा में विशेष रूप से पढ़ी जाती है। इसके नियम अधिक सख्त हैं।

बजरंग बाण — संपूर्ण पाठ

॥ बजरंग बाण ॥

॥ दोहा ॥
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करें सन्मान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करें हनुमान॥

॥ चौपाई ॥
जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी।
जन के काज बिलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महासुख दीजै।

जैसे कूदि सिन्धु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा।
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका।

जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा।
बाग उजारि सिन्धु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा।

अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक जारा।
लाह लगाई लंका जारी। खल बध किये रामहित भारी।

बजरंग बाण जाके मन में। महाप्रताप जासु जग जाना।
सत्य हो उसके सब काना। बैरी भाग सात समुद्रा।

मैं अनाथ एकनाथ प्रभु आहि। दुख परो मोहि नाथ अब चाहि।
आय करो रक्षा अब मोरी। नाथ हनुमत सर्बहित तोरी।

जय जय जय हनुमान गोसाई। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।
गोसाई इहि अर्ज हमारी। जो सत बार जपत मन भारी।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।

॥ दोहा ॥
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

बजरंग बाण का पूर्ण विस्तारित पाठ देखें:

पूर्ण बजरंग बाण पाठ →हनुमान चालीसा
बजरंग बाण — संपूर्ण पाठ, नियम और सावधानियाँ | वेदकोश | VedKosh