🌑 अमावस्या — तिथि, महत्व और पितृ-पूजन

अमावस्या हिन्दू पंचांग की वह तिथि है जब चंद्रमा आकाश में दिखाई नहीं देता। यह पितरों की शांति, पितृ तर्पण और आत्म-शुद्धि के लिए सर्वोत्तम दिन माना जाता है।

🕉️ अमावस्या का महत्व

  • पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करें — यह उन्हें मोक्ष की ओर ले जाता है।
  • इस दिन स्नान-दान से पितृ दोष दूर होता है और घर में सुख-शांति आती है।
  • शनि दोष, कालसर्प दोष एवं पितृ दोष के निवारण के लिए यह तिथि विशेष मानी जाती है।
  • भगवान शिव, काली माता और पितृ देव की पूजा के लिए श्रेष्ठ दिन।

🙏 पितृ तर्पण विधि

  1. प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
  2. नदी, तालाब या घर में स्वच्छ जल से तर्पण करें।
  3. जल में काले तिल मिलाकर दोनों हाथों से पितरों को जल दें।
  4. “ॐ पितृभ्यः नमः” का उच्चारण करते हुए 3 बार जल अर्पित करें।
  5. ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा दें।
  6. गाय को चारा और कुत्तों को रोटी खिलाएं।

क्या करें

  • उपवास रखें
  • पितरों को जल दें
  • दान-धर्म करें
  • शिव मंदिर जाएं
  • पवित्र नदी में स्नान करें

क्या न करें

  • माँस-मदिरा का सेवन न करें
  • बाल-नाखून न काटें
  • नए कार्य शुरू न करें
  • मांगलिक कार्य न करें
  • झगड़े से बचें

📅 आगामी अमावस्याएं

मौनी अमावस्या (माघ अमावस्या)
2026-01-18
फाल्गुन अमावस्या
2026-02-17
चैत्र अमावस्या
2026-03-19
वैशाखा अमावस्या
2026-04-17
ज्येष्ठा अमावस्या / शनि जयंती / वट सावित्री व्रत
2026-05-16
अधिक मास अमावस्या
2026-06-15
आषाढ़ अमावस्या
2026-07-14
श्रावण अमावस्या / हरियाली अमावस्या
2026-08-12
भाद्रपद अमावस्या
2026-09-11
आश्विन अमावस्या / महालय अमावस्या
2026-10-10
कार्तिक अमावस्या / गोवर्धन पूजा
2026-11-09
मार्गशीर्ष अमावस्या
2026-12-08

🕉️ पितृ तर्पण मंत्र

ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः ।
ॐ पितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः ।
ॐ प्रपितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः ॥
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