ऋग्वेद • धन स्तोत्र

श्री सूक्तम् — 16 मंत्रों का महत्व

श्री सूक्तम् ऋग्वेद के परिशिष्ट में मिलने वाला वह स्तोत्र है जो माँ श्री (लक्ष्मी) को समर्पित है। इसके 16 मंत्र एक पूर्ण "धन-कवच" हैं — धन आकर्षित करने, उसे बनाए रखने और उसे आध्यात्मिक उद्देश्य के लिए उपयोग करने का विधान।

16 मंत्रों की संरचना

मंत्र 1-4

आह्वान

माँ श्री का आवाहन — प्रकाश, सोने और कमल के साथ

मंत्र 5-8

गुण वर्णन

माँ की श्वेत वर्ण, गजराज सेवित और नित्य समृद्ध स्वरूप

मंत्र 9-12

वरदान

धन, पशु, संतान और स्वास्थ्य का आशीर्वाद

मंत्र 13-16

स्थायित्व

लक्ष्मी को स्थायी करने की प्रार्थना — "न त्वजामि कदाचन"

पूजा सामग्री

Somvar Puja Checklist

0/7
  • कमल के फूल — 16 (प्रत्येक मंत्र के लिए एक)
  • शुद्ध घी — हवन या दीपक के लिए
  • लाल वस्त्र — माँ लक्ष्मी की छवि के लिए
  • सोने का सिक्का या आभूषण — पूजा स्थान पर
  • गोबर का लेप — पूजास्थान की शुद्धि के लिए
  • पंचामृत — अभिषेक के लिए
  • चावल की खीर — नैवेद्य

पूजा विधि

1

स्थान शुद्धि

गोबर या गंगाजल से पूजास्थान शुद्ध करें। उत्तर या ईशान दिशा में माँ की स्थापना करें।

2

संकल्प

"श्री सूक्तम् पाठ से माँ लक्ष्मी की प्रसन्नता और धन-समृद्धि के लिए" — संकल्प लें।

3

पुष्पांजलि विधि

प्रत्येक मंत्र के साथ एक कमल अर्पित करें। 16 मंत्र = 16 फूल।

4

घृत दीप

पाँच बत्तियों वाला घी का दीपक जलाएं — पाठ के दौरान बुझने न दें।

5

समर्पण

पाठ पूरा होने पर "इदं न मम" बोलकर फल-नैवेद्य माँ को समर्पित करें।

श्रेष्ठ मुहूर्त

शुक्रवार प्रातः 6-8 AM

शुक्र उदय काल

श्रेष्ठ

शुक्रवार अभिजित 12-1 PM

सर्वसिद्धिदायक

उत्तम

वरलक्ष्मी व्रत (28 अगस्त 2026)

वर्ष का सर्वश्रेष्ठ दिन

अत्युत्तम

अष्टमी-पूर्णिमा शुक्रवार

लक्ष्मी-शक्ति तिथि

उत्तम
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