स्थापना अनुष्ठान

अक्षय तृतीया सोना स्थापना विधि

अक्षय तृतीया पर खरीदा सोना केवल रखने से नहीं, बल्कि सही विधि से "स्थापित" करने से अक्षय (अविनाशी) संपत्ति का निर्माण होता है। 24 अप्रैल 2026 (शुक्रवार, बगलामुखी जयंती) इस स्थापना के लिए विशेष शुभ है।

सही दिशा — वास्तु अनुसार

ईशान (उत्तर-पूर्व)

सर्वोत्तम — देवताओं का कोण। धन और सौभाग्य के लिए।

उत्तर

उत्तम — कुबेर की दिशा। धन वृद्धि के लिए।

पूर्व

ठीक — सूर्य की दिशा। ऊर्जा और समृद्धि।

दक्षिण/पश्चिम

वर्जित — यम/वरुण की दिशा। धन हानि का कारण।

स्थापना विधि — 6 चरण

1

शुद्धि

सोने को गंगाजल या गुलाब जल से धोएं। सफेद रुमाल से पोंछें।

2

पूजा थाल

लाल या पीले कपड़े पर थाल रखें। हल्दी-कुमकुम, अक्षत, फूल तैयार करें।

3

माँ लक्ष्मी आह्वान

"ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" — 21 बार बोलें।

4

तिलक

सोने पर हल्दी-कुमकुम का तिलक लगाएं। अक्षत चढ़ाएं।

5

स्थापना मंत्र

"ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।" बोलते हुए सोना ईशान कोण में रखें।

6

ढकना

लाल कपड़े में लपेटकर ईशान कोण की तिजोरी/दराज में रखें।

करें

  • हर शुक्रवार सोने पर दीपक जलाएं
  • अमावस्या और पूर्णिमा पर दर्शन करें
  • वर्षभर में एक बार पुनः पूजा करें
  • घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखें

न करें

  • बेडरूम में न रखें — ऊर्जा कमजोर होती है
  • जूते-चप्पल के पास न रखें
  • टूटा या खंडित आभूषण न रखें
  • किसी को दिखाने की आदत न डालें
अक्षय तृतीया का सोना कैसे स्थापित करें — स्थापना विधि | वेदकोश | VedKosh