महाभारत — अनुशासन पर्व
ॐ विश्वं विष्णुर्वषट्कारो भूतभव्यभवत्प्रभुः
Om Vishwam Vishnur-vashatkaaro Bhoota-bhavya-bhavat-prabhuh
"ब्रह्माण्ड स्वयं ही विष्णु हैं — वे भूत, वर्तमान और भविष्य के स्वामी हैं।" — नाम 1–2
1000
नाम
108
प्रमुख नाम
13
फलश्रुति-लाभ
भीष्म
वक्ता
कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद, भीष्म पितामह बाणों की शैया पर लेटे हैं और उत्तरायण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। युधिष्ठिर उनके पास जाकर पूछते हैं: "जो मनुष्य एक नाम से सभी देवताओं को संतुष्ट कर सके — वह नाम क्या है?" भीष्म उत्तर देते हैं कि ऐसा एकमात्र नाम "नारायण" है — और फिर विष्णु के 1000 नामों का पाठ करते हैं। यह संवाद महाभारत के अनुशासन पर्व (अध्याय 149) में संकलित है।
स्रोत
महाभारत, अनुशासन पर्व (अ. 149)
वक्ता
भीष्म पितामह (बाणशैया पर)
श्रोता
युधिष्ठिर (महाराज)
नाम-संख्या
1000 (+8 opening slokas)
सृष्टि · पालन · संहार — त्रिगुण का प्रतिबिम्ब
संस्कृत व्युत्पत्ति और दार्शनिक महत्त्व
विष् — व्याप्त होना
पहला और सर्वप्रमुख नाम: विष्णु = "जो सर्वत्र व्याप्त है।" हर परमाणु, हर विचार, हर श्वास में। केवल मन्दिर-देवता नहीं — सम्पूर्ण अस्तित्व का आधार।
हृषीक + ईश — इन्द्रियों के स्वामी
अर्जुन ने भगवद्गीता के लिए कृष्ण को इसी नाम से पुकारा। इन्द्रियों के स्वामी — भौतिक ज्ञानेन्द्रियों और उनके पीछे की ब्रह्माण्डीय शक्तियों के नियंता।
पद्म + नाभ — कमल + नाभि
शेषनाग पर योग-निद्रा में शयित विष्णु की नाभि से कमल प्रकट होता है — जिसमें ब्रह्मा का जन्म होता है। अनन्तशयन — विष्णु का सर्वाधिक प्रतिष्ठित चित्रण। तिरुवनन्तपुरम् के पद्मनाभस्वामी मन्दिर का मूल।
नर + अयन — जीवात्माओं का गंतव्य/निवास
नारायण — समस्त जीवों का आश्रय (नर = आत्मा, अयन = निवास)। सभी जीव अन्ततः नारायण में लीन होते हैं। "जल पर विचरण करने वाले" (नर = जल, अयन = गमन) — अनन्तशयन का संकेत। विष्णु का पर्याय।
अनुशासन पर्व में भीष्म द्वारा वर्णित — 13 वरदान
भय-मुक्ति
शत्रु-बाधा-निवारण
मनोकामना-पूर्ति
दीर्घायुष्य
उत्तम संतान-प्राप्ति
धन और समृद्धि
कार्य-सिद्धि
रोग-निवारण
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष प्राप्ति
न्यायालय में विजय
दुःख-संकट-नाश
प्रसव-सुरक्षा और बाल-रक्षा
अन्त-काल में मोक्ष
दिन
गुरुवार (बृहस्पतिवार)
समय
प्रातःकाल या सन्ध्याकाल
आवृत्ति
1 पाठ (क्रम) या 108 बार कोई एक नाम
विशेष अवसर
एकादशी, जन्माष्टमी, विष्णु-व्रत
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