स्कंद पुराणसुरक्षा कवच
🛡️ सूर्य कवच स्तोत्र — शरीर का दिव्य सुरक्षा आवरण
स्कंद पुराण का यह कवच सूर्य के 12 आदित्य रूपों से शरीर के हर अंग की रक्षा करता है। रविवार पाठ से दुर्घटना, शत्रु और रोग से अजेय सुरक्षा।
📖 सूर्य कवच — स्कंद पुराण से
सूर्य कवच स्तोत्र स्कंद पुराण के ब्रह्मखंड में मिलता है। इसमें सूर्य के 12 अंगों (मस्तक से पादों तक) को क्रमशः 12 आदित्य रूपों से रक्षित किया जाता है। यह कवच उन लोगों के लिए विशेष है जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर है या शत्रु बाधा, दुर्घटना का डर है। रविवार को पाठ से सूर्य देव का दिव्य सुरक्षा-आवरण मिलता है।
🕉️ सूर्य कवच — संपूर्ण पाठ
॥ सूर्य कवचम् ॥ ॐ श्रीसूर्यः शिरो रक्षेत्, ललाटं रक्षतु द्युमान् । नेत्रे रक्षतु मार्तण्डः, श्रोत्रे रक्षतु भास्करः ॥ घ्राणं रक्षतु मित्रश्च, वक्त्रं रक्षतु वेदधृक् । कण्ठं रक्षतु भानुश्च, भुजौ रक्षतु सविता ॥ हृदयं रक्षतु पूषा च, जठरं रक्षतु त्वष्टा । कटिं रक्षतु आदित्यः, पादौ रक्षतु सूर्यकः ॥ सर्वाङ्गं रक्षतु प्रभुः, सर्वत्र विजयो भवेत् । सूर्यकवचमिदं पुण्यं, सर्वदोषविनाशनम् ॥
📖 प्रमुख श्लोकों के अर्थ
ॐ श्रीसूर्यः शिरो रक्षेत्
मेरे मस्तक की रक्षा श्री सूर्य करें, माथे की रक्षा द्युमान (प्रकाशमान) करें
नेत्रे रक्षतु मार्तण्डः
मेरे नेत्रों की रक्षा मार्तण्ड (सूर्य) करें, कानों की रक्षा भास्कर करें
हृदयं रक्षतु पूषा च
हृदय की रक्षा पूषा (पोषण देने वाले सूर्य) करें, पेट की रक्षा त्वष्टा करें
सर्वाङ्गं रक्षतु प्रभुः
सभी अंगों की रक्षा प्रभु करें, सभी ओर विजय हो
🌟 4 प्रमुख लाभ
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दुर्घटना सुरक्षा
सूर्य कवच से शरीर के हर अंग पर आदित्य का सुरक्षा-आवरण बनता है
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शत्रु-भय मुक्ति
जिनके जीवन में शत्रु बाधाएं हैं — सूर्य कवच पाठ से शत्रु का सामना करने की शक्ति
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नेत्र रोग
नेत्रों पर मार्तण्ड की विशेष कृपा — रविवार पाठ से आंखों की बीमारी में लाभ
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सरकारी पद
सूर्य राज्य और पद का कारक — कवच पाठ से सरकारी नौकरी और पदोन्नति
✅ पाठ विधि — 5 चरण
☑ सूर्य कवच पाठ चेकलिस्ट
0/5- रविवार सूर्योदय — अर्घ्य के बाद सूर्य कवच पाठपूर्व मुख, आसन पर बैठकर
- 3 बार पाठ करें — एक बार सामान्य, दूसरी बार धीमे, तीसरी बार पुनः सामान्य
- हर श्लोक के बाद संबंधित अंग को स्पर्श करें"शिरो रक्षेत्" पर सिर, "हृदयं" पर हृदय
- पाठ के बाद सूर्य नमस्कार 12 बार
- 21 रविवार तक निरंतर पाठ — पूर्ण कवच सिद्धिशत्रु-भय या दुर्घटना के समय 108 बार