🪐 शनि महामंत्र — 108 बार जप विधि और लिरिक्स

शनि बीज मंत्र और महामंत्र — अनुशासन, देरी निवारण और कर्म शुद्धि

शनि बीज मंत्र

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
Om Praam Preem Praum Sah Shanaishcharaya Namah।

शनि महामंत्र (नीलांजन श्लोक)

नीलाञ्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
Nilaanjana Samaabhasam Raviputram Yamagrajam।
Chhaayaa Maartanda Sambhootam Tam Namaami Shanaishcharam॥

अर्थ: नीलांजन के समान श्यामवर्ण, रवि के पुत्र, यम के अग्रज, छाया और मार्तण्ड से उत्पन्न शनैश्चर को मैं नमन करता हूँ।

108 जप की सही विधि

1

माला चुनाव

काली हकीक माला (Black Hakik) या लोहे की माला सर्वश्रेष्ठ। रुद्राक्ष माला भी स्वीकार्य है।

2

आसन

काले या नीले आसन पर बैठें। पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर मुख करें।

3

जप प्रारंभ

पहले 3 बार "ॐ शं शनैश्चराय नमः" बोलकर संकल्प लें। फिर माला से 108 जप करें।

4

ध्यान मुद्रा

ज्ञान मुद्रा (तर्जनी और अंगूठे का स्पर्श) में जप करें। मन में शनि देव की नीली आभा का ध्यान करें।

5

जप के बाद

जप के अंत में सरसों तेल का दीपक जलाएं और शनि देव को प्रणाम करें।

शनिवार जप का सर्वश्रेष्ठ समय

समयलाभआदर्श?
ब्रह्म मुहूर्त: 4:00–5:30 AMमानसिक अनुशासन और ध्यान में सहायक
सूर्योदय: 6:00–7:00 AMदिन की शुभ शुरुआत
प्रदोष काल: 5:30–7:00 PMशनि और शिव दोनों प्रसन्न
रात्रि: 9:00–10:00 PMशनि की स्थिर ऊर्जा में जप

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