यमुना माता
ओम जय यमुने माता
माँ यमुना की पवित्र आरती जो मथुरा-वृंदावन के घाटों पर प्रतिदिन होती है और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ी है।
इस आरती के बारे में
माँ यमुना की आरती सूर्यपुत्री और यमराज की बहन यमुना को समर्पित है जिनके तट पर श्रीकृष्ण ने अपनी बाल लीलाएं की थीं।
पाठ का समय
यमुना षष्ठी, भाई दूज, मथुरा-वृंदावन घाटों पर प्रतिदिन, कार्तिक पूर्णिमा
Hindi Lyrics (मूल पाठ)
ओम जय यमुने माता, मैया जय यमुने माता। जो ध्यावत नर नारी, मनवांछित फल पाता॥ ओम जय यमुने माता॥ सूर्य पुत्री यमुना, यमराज की बहना। भाई दूज पर्व पर, भक्तों को वरदान देना॥ ओम जय यमुने माता॥ काली-कमली वाले ने, तेरे जल में लीला। कालिया नाग को नाथा, रास रचाया नीला॥ ओम जय यमुने माता॥ मथुरा वृंदावन में, तेरा महिमा उजारा। केशी घाट पर स्नान से, हो पाप सारा निवारा॥ ओम जय यमुने माता॥ आगरा प्रयाग तट पर, गंगा से मिलन होता। त्रिवेणी संगम पवित्र, मोक्ष का मार्ग होता॥ ओम जय यमुने माता॥
📖 अर्थ / भावार्थ
सूर्य पुत्री यमुना — यमुना भगवान सूर्य की पुत्री और यमराज की बहन हैं।
भाई दूज पर वरदान — भाई दूज पर यमुना के किनारे स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
कालिया नाग को नाथा — कृष्ण ने इसी यमुना नदी में कालिया नाग को नाथकर भक्तों को भयमुक्त किया।
त्रिवेणी संगम — प्रयाग में यमुना गंगा और सरस्वती से मिलकर तीर्थराज प्रयाग बनाती हैं।