🔱 मंगलवार क्यों विशेष? मंगल (Mars) ऊर्जा, साहस और शक्ति का ग्रह है। हनुमान जी इसी ऊर्जा के देवता हैं — "मंगलमूर्ति"। मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ मंगल दोष शांत करता है, साहस बढ़ाता है और दुश्मनों का भय दूर करता है।
दोहा :
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
चौपाई :
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।
संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।
विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।
अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।
दोहा :
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
🛁पाठ से पहले स्नान करें — शुद्धता आवश्यक है।
🌅मंगलवार और शनिवार को पाठ का विशेष फल मिलता है। सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद।
🪔घी का दीपक और लाल पुष्प अर्पित करें।
🕉️मन में श्रद्धा और स्थिर चित्त से पाठ करें — बीच में न रोकें।
🔢7 बार पाठ = विशेष सिद्धि। 40 दिन लगातार = मनोकामना पूर्ति।
हनुमान चालीसा का महत्व
हनुमान चालीसा संपूर्ण हिन्दू धर्म में सबसे व्यापक रूप से पढ़ा जाने वाला भक्ति ग्रंथ है, जो क्षेत्रीय, भाषाई और सांप्रदायिक सीमाओं को पार करता है। 16वीं शताब्दी में कवि-संत गोस्वामी तुलसीदास द्वारा अवधी भाषा में रचित, यह चालीस छंदों का भजन (चालीसा का अर्थ 'चालीस') भगवान हनुमान — भगवान राम के अमर भक्त — की भक्ति की सर्वोत्कृष्ट अभिव्यक्ति बन गया है।
तुलसीदास ने हनुमान चालीसा व्यक्तिगत संकट के समय लिखी — परंपरा के अनुसार उन्होंने इसे मुगल सम्राट अकबर द्वारा चमत्कार करने के लिए कैद किए जाने के दौरान रचा। यह रचना गहन भक्ति से उत्पन्न हुई और इसमें एक असाधारण आध्यात्मिक शक्ति है जिसका अनुभव लाखों भक...