शुक्रवार व्रत

वैभव लक्ष्मी व्रत कथा

शुक्रवार का व्रत — धन, वैभव और पारिवारिक सुख के लिए

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प्रदोष काल — सर्वाधिक शुभ समय

शाम 6:00 – 7:30 बजे (सूर्यास्त + 1.5 घंटे)

वैभव लक्ष्मी की पूजा का सर्वाधिक खोजा जाने वाला तथ्य — प्रदोष काल में पूजा 10 गुना फल देती है। इस समय माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं।

वैभव लक्ष्मी व्रत कथा

एक बार एक गरीब किंतु धर्मपरायण महिला थी जिसका नाम सुमंगला था। उसके पति बीमार थे और घर में कोई धन नहीं था। एक दिन उसे पड़ोसन से वैभव लक्ष्मी व्रत के बारे में पता चला। सुमंगला ने हर शुक्रवार को वैभव लक्ष्मी की पूजा करने का संकल्प लिया। वह शाम के प्रदोष काल में — जब सूर्यास्त के बाद का पहला डेढ़ घंटा होता है — ध्यान और श्रद्धा से पूजा करती थी। कुछ ही हफ्तों में उसके पति की बीमारी दूर हुई, व्यापार में उन्नति हुई और घर में धन-धान्य की वृद्धि हुई। सुमंगला ने कृतज्ञता से 11 व्रत पूरे किए और उद्यापन किया। वैभव लक्ष्मी ने स्वप्न में आकर कहा: "जो मेरी पूजा शुक्रवार के प्रदोष काल में करेगा, उसे धन, वैभव और पारिवारिक सुख मिलेगा।"

पूजा सामग्री सूची

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  • लाल या गुलाबी चुनरी
    वैभव लक्ष्मी को चढ़ाएं
  • कमल के फूल या गुलाब
    पूजन के लिए
  • खीर और मिठाई
    भोग के लिए
  • पान के पत्ते — 11 या 21
    पूजा सामग्री
  • नारियल — 1
    पूजा में रखें
  • सुपारी और सिक्के
    संकल्प के लिए
  • दीपक — घी का
    प्रदोष काल पूजन

पूजा विधि — क्रमशः

1शुक्रवार शाम 6 बजे (प्रदोष काल) से पूजा प्रारंभ करें
2स्नान करके लाल या गुलाबी वस्त्र धारण करें
3पूजा स्थान को साफ करके लाल/गुलाबी चुनरी बिछाएं
4वैभव लक्ष्मी की मूर्ति/चित्र स्थापित करें
5धूप, दीप, कमल के फूल और खीर अर्पित करें
6वैभव लक्ष्मी व्रत कथा पढ़ें
7ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः का 108 बार जाप करें
8परिवार में प्रसाद वितरित करें
911 व्रत पूरे होने पर उद्यापन करें
वैभव लक्ष्मी व्रत कथा और विधि — शुक्रवार प्रदोष काल विशेष | वेदकोश | VedKosh