🛡️ सूर्य कवच स्तोत्र — शरीर का दिव्य सुरक्षा कवच
सूर्य कवच में सूर्य देव के अलग-अलग नाम शरीर के हर अंग की रक्षा करते हैं। रविवार सूर्योदय पर पाठ से सप्ताह भर की सुरक्षा।
📖 सूर्य कवच स्तोत्र — 5 श्लोक
॥ सूर्य कवच स्तोत्र ॥ शिरो मे भास्करः पातु ललाटं मे विभावसुः। नेत्रे द्वादशभिः पातु श्रोत्रे मे जगतां पतिः॥ नासिकां मे सुरश्रेष्ठः पातु वक्त्रं च सप्तमिः। जिह्वां मे मित्रदेवश्च कण्ठं मे सूर्य एव च॥ स्कन्धौ मे पातु सवित्री बाहू मे भानुरव्ययः। करौ मे पूषणः पातु हृदयं मे विवस्वतः॥ उदरं मे महातेजाः पातु नाभिं च भास्करः। कटिं मे पातु सूर्यश्च ऊरू मे रविरव्ययः॥ जानुनी मे सविता पातु जंघे मे दिनकृत् सदा। पादौ मे पातु सूर्यश्च सर्वांगं मे सुरेश्वरः॥
💡 3 प्रमुख श्लोकों का अर्थ
शिरो मे भास्करः पातु...
भास्कर मेरे मस्तिष्क की, विभावसु मेरे माथे की, बारह-नाम वाले मेरी आंखों की और जगतपति मेरे कानों की रक्षा करें।
स्कन्धौ मे पातु सवित्री...
सविता मेरे कंधों की, अव्यय भानु मेरी बाहों की, पूषण मेरे हाथों की और विवस्वान मेरे हृदय की रक्षा करें।
पादौ मे पातु सूर्यश्च...
सूर्य मेरे पैरों की और सुरेश्वर मेरे संपूर्ण शरीर की रक्षा करें — सभी अंगों में सूर्य का कवच हो।
✅ सूर्य कवच पाठ के 6 लाभ
☑ सूर्य कवच लाभ चेकलिस्ट
0/6- शरीर के हर अंग की दैवीय सुरक्षाPhysical protection through solar energy
- रोग, दुर्घटना और शत्रु भय से मुक्तिFreedom from illness, accidents and enemies
- सूर्य महादशा में रक्षा कवचProtective shield during Surya Mahadasha
- आंखों और हड्डियों को विशेष बलSpecial strength to eyes and bones
- सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वासPositive energy and self-confidence
- रविवार पाठ से साप्ताहिक ऊर्जा पुनर्भरणWeekly energy recharge through Sunday recitation