🌑 शनि दण्डकम् स्तोत्र — पूर्ण पाठ और अर्थ

शनि दण्डकम् — शनि देव की प्राचीन और दुर्लभ स्तुति। शनिवार प्रातःकाल पाठ करने से शनि दोष, साढ़े साती और करियर बाधाओं में तीव्र राहत मिलती है।

📜 पूर्ण शनि दण्डकम् पाठ

श्री शनि दण्डकम्

जय जय शनिदेव, नमो नमः पापनाशनाय।
कृष्णवर्णाय, नीलाम्बरधाराय, शनैश्चराय नमः॥

कालरूपाय, कालात्मने, महाकालाय नमो नमः।
यमाग्रजाय, छायापुत्राय, शनैश्चराय नमः॥

मन्दगमनाय, तीक्ष्णदृष्टये, कर्मफलप्रदाय।
नीलांजनसमाभासाय, शनैश्चराय नमो नमः॥

सप्तमुखाय, सप्तरश्मये, सप्तार्चिर्भुवनेश्वराय।
त्रिलोकपूजिताय, शनैश्चराय नमो नमः॥

पिप्पलादमुनिप्रियाय, पाशहस्ताय, वरदाय।
भक्तानुग्रहकारिणे, शनैश्चराय नमो नमः॥

इति शनि दण्डकम् सम्पूर्णम्।

📖 प्रमुख श्लोकों का अर्थ

कालरूपाय, कालात्मने, महाकालाय नमो नमः।
शनि देव काल के स्वरूप हैं। वे महाकाल के अंश हैं जो प्रत्येक जीव को कर्म के अनुसार फल देते हैं।
मन्दगमनाय, तीक्ष्णदृष्टये, कर्मफलप्रदाय।
शनि धीरे चलते हैं परंतु उनकी दृष्टि तीव्र है। वे कर्म के अनुसार फल देने वाले हैं।
पिप्पलादमुनिप्रियाय, पाशहस्ताय, वरदाय।
शनि देव ऋषि पिप्पलाद के प्रिय हैं। वे पाश धारण करते हैं और वरदान देने वाले हैं।

✨ शनि दण्डकम् पाठ के 6 लाभ

1. साढ़े साती और ढैय्या में कष्ट कम होते हैं
2. शनि दोष का शमन होता है
3. करियर और व्यापार में बाधाएं दूर होती हैं
4. न्यायिक मामलों में अनुकूल परिणाम
5. मानसिक शांति और भय से मुक्ति
6. शनि की कृपा से दीर्घायु और समृद्धि

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