पितृ अनुष्ठान

गुरुवार पितृ तर्पण

बृहस्पति कृपा से पितृ मोक्ष और पारिवारिक शांति

बृहस्पति को "गुरु-तत्व" का कारक माना जाता है — वे पितरों और आत्माओं के उद्धार में सहायक हैं। गुरुवार को पितृ तर्पण करने से पितरों को विशेष तृप्ति मिलती है और कुंडली के बृहस्पति-दोष भी कम होते हैं।

गुरुवार तर्पण विधि

1

प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2

दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।

3

तांबे के पात्र में जल, काले तिल और जौ (बार्ली) मिलाएं।

4

पितरों का नाम लेकर "अमुकस्य तर्पयामि" कहते हुए जल अंजलि से अर्पित करें।

5

गुरुवार को पीले फूल और केला भी तर्पण के साथ अर्पित करें।

6

बृहस्पति मंत्र — ॐ बृं बृहस्पतये नमः — का 21 बार जप करें।

विशेष दिन और संयोग

गुरुवार + अमावस्या

सर्वाधिक प्रभावशाली — बृहस्पति और पितृ-तिथि का संयोग

गुरुवार + पुष्य नक्षत्र (गुरु पुष्य)

पितृ मोक्ष के लिए अत्यंत शुभ

पितृ पक्ष (श्राद्ध) का गुरुवार

पितृ पक्ष के 16 दिनों में आने वाला गुरुवार

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