पितृ शांतिसंध्याकाल
🪔 रविवार संध्या दीपक — पूर्वजों की शांति और परिवार का आशीर्वाद
रविवार सूर्यास्त — जब सूर्य क्षितिज पर होते हैं, तब दक्षिण दिशा में घी का दीपक जलाना पितरों के लिए प्रकाश-मार्ग खोलता है। यह सबसे सरल, सबसे शक्तिशाली पितृ उपाय है।
📜 सूर्य = पितृ देवता
वैदिक परंपरा में सूर्य को पितृ देवता माना गया है — "सूर्याद्यपितरो जाताः" (अथर्ववेद)। सूर्य ही पितृ लोक का प्रकाश है। रविवार को सूर्यास्त के समय दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से पितरों को वह प्रकाश मिलता है जो उन्हें मुक्ति की ओर ले जाता है।
🧭 दक्षिण दिशा क्यों?
1
दक्षिण = यम की दिशा
यमलोक (पितृ लोक) दक्षिण दिशा में है — इसीलिए पितृ कार्य दक्षिण मुख होकर किए जाते हैं
2
सूर्यास्त = संधि काल
दिन और रात का मिलन बिंदु — इस समय सूर्य का प्रभाव पितृ लोक तक पहुंचता है
3
रविवार = सौर दिन
सूर्य के दिन किए गए पितृ कार्य में सूर्य स्वयं माध्यम बनते हैं — फल दोगुना होता है
🕯️ सामग्री
घी का दीपक
गाय के घी का — तिल के तेल का दीपक भी शुभ है
तिल (काले)
पितरों को तिल अत्यंत प्रिय है
जल पात्र
तांबे या मिट्टी का, जल अर्पण के लिए
फूल (सफेद)
पितरों को सफेद फूल प्रिय हैं
🕐 2026 सूर्यास्त काल
अप्रैल-मई 20266:45 – 7:15 PMसूर्यास्त 6:30-6:45 के आसपास — शुरू करें 6:15 PM
जून-जुलाई 20267:30 – 8:00 PMदेर सूर्यास्त — शुरू करें 7:00 PM
✅ पितृ दीपक विधि — 5 चरण
☑ पितृ दीपक चेकलिस्ट
0/5- रविवार सूर्यास्त से 30 मिनट पहले दक्षिण कोण साफ करेंफर्श पोंछें, साफ आसन बिछाएं
- घी का दीपक दक्षिण दिशा में, दक्षिण मुख होकर जलाएं
- काले तिल दीपक के चारों ओर डालेंमंत्र: ॐ पितृभ्यो नमः
- तांबे के पात्र से जल दक्षिण में अर्पित करें"मेरे पूर्वजों को शांति मिले"
- दीपक पूरे जलने दें, फिर जल में प्रवाहित करेंदीपक सूर्यास्त के बाद कम से कम 15 मिनट जलाएं