🕯️ शनिवार पीपल दीपक — 10 नियम
विधि जाननी है? पीपल दीपक विधि (Set 25) →
✅ केवल सूर्यास्त के बाद
पीपल दीपक सूर्यास्त से 30 मिनट बाद ही जलाएं। दिन में जलाना पितृ तर्पण नहीं, सूर्य पूजा हो जाती है।
✅ सरसों तेल — कोई विकल्प नहीं
घी या अन्य तेल मत डालें। सरसों ही शनि का प्रिय तेल है। इसका कोई विकल्प नहीं।
✅ पश्चिम दिशा में रखें
दीपक का मुख पश्चिम दिशा में — शनि की दिशा। पूर्व या उत्तर गलत है।
🚫 नंगे पैर नहीं
पीपल के नीचे नंगे पैर मत जाएं — विशेषकर शाम को। जूते उतारें लेकिन मोज़े पहन सकते हैं।
🚫 तुलसी पत्ता मत चढ़ाएं
तुलसी = विष्णु की पत्नी। पीपल = शनि/पितृ। इन दोनों का मिश्रण वर्जित है।
✅ मोटी बाती नहीं
कपास की पतली 7-तार बाती — लंबे समय तक जलती है। मोटी बाती धूम देती है जो शुभ नहीं।
✅ पेड़ की जड़ में पहले जल
दीपक से पहले पीपल जड़ में जल + काले तिल चढ़ाएं। "ॐ पितृ देवाय नमः" 3 बार।
🚫 दीपक बुझाएं नहीं
दीपक स्वयं बुझने दें। बीच में फूँक मारना या बुझाना — इसे अपशकुन माना जाता है।
🚫 मासिक धर्म में न जाएं
महिलाएं मासिक धर्म में पीपल वृक्ष के पास न जाएं — परंपरागत नियम।
✅ लोहे के पात्र में तेल
मिट्टी के दीये का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन लोहे की कटोरी शनि की धातु होने से अधिक प्रभावी।
☑ पीपल दीपक सामग्री
0/6- सरसों तेलMustard oil — forbidden to substitute
- लोहे की कटोरीIron bowl — not clay/brass
- काले तिलBlack sesame — for offering
- कपास की बाती (7 तार)Cotton wick — 7-strand, not thick
- जल कलशWater pot — for peepal root offering
- काला कपड़ा (1 टुकड़ा)Small black cloth — for Shani