दक्षिण भारतीय परंपरा — मंगलवार पूजा

भगवान मुरुगन मंगलवार पूजा विधि

षण्मुख, सुब्रमण्यम, कार्तिकेय — मंगलवार के दिव्य देव

🔴 मुरुगन और मंगल — एक ही शक्ति

उत्तर भारत में मंगलवार को "भूमिपुत्र मंगल" की पूजा होती है। दक्षिण भारत में यही शक्ति "मुरुगन / कार्तिकेय" के रूप में प्रकट है। दोनों युद्ध, साहस और बाधा निवारण के देव हैं। दक्षिण भारतीय परिवारों के लिए मुरुगन की मंगलवार पूजा सर्वोच्च अनुष्ठान है।

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मंगल देव की पहचान

उत्तर भारत में मंगलवार का देवता मंगल (भूमिपुत्र) हैं, जबकि दक्षिण भारत में मुरुगन (कार्तिकेय) को मंगल के रूप में पूजा जाता है।

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षण्मुख — 6 मुख

भगवान मुरुगन के 6 मुख हैं (षण्मुख)। प्रत्येक मुख 6 दिशाओं की रक्षा करता है।

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मयूरवाहन

मुरुगन जी का वाहन मयूर (मोर) है। मोर सर्पों का नाश करता है — यानी अज्ञान और रोग का नाश।

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वेल की शक्ति

वेल (भाला) मुरुगन जी का आयुध है जो माँ पार्वती ने दिया था। यह बुराई के विनाश का प्रतीक है।

मुरुगन पूजा सामग्री

0/10
  • वेल (भाला)
    मुरुगन जी का आयुध
  • लाल पुष्प (गुलाब/कनेर)
    21 फूल
  • लाल वस्त्र
    देव प्रतिमा के लिए
  • मयूर पंख
    सजावट के लिए
  • शहद
    अभिषेक के लिए
  • पंचामृत
    दूध, दही, घी, शहद, शक्कर
  • चंदन
    लाल चंदन विशेष
  • कपूर
    आरती के लिए
  • केला
    भोग के लिए
  • दीपक
    घी का

🪔 मंगलवार पूजा विधि — 8 चरण

1

स्नान और शुद्धि

मंगलवार प्रातः स्नान करके लाल या नारंगी वस्त्र धारण करें। दक्षिण भारतीय परंपरा में तिलक लगाना अनिवार्य है।

2

पंचामृत अभिषेक

मुरुगन जी की प्रतिमा को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से क्रमशः अभिषेक करें। फिर शुद्ध जल से स्नान कराएँ।

3

वस्त्र और वेल

लाल वस्त्र पहनाएँ। वेल (भाला) को लाल फूलों से सजाएँ — यह मुरुगन जी का प्रमुख आयुध है।

4

पुष्प और चंदन

21 लाल गुलाब या कनेर के फूल चढ़ाएँ। लाल चंदन से तिलक करें।

5

मंत्र जाप

"ॐ शरवणभव" का 108 बार जाप करें। "ॐ षण्मुखाय नमः" का भी 21 बार उच्चारण करें।

6

सुब्रमण्यम अष्टकम्

सुब्रमण्यम अष्टकम् का पाठ करें — यह मुरुगन जी की स्तुति का सर्वश्रेष्ठ स्तोत्र है।

7

आरती और भोग

कपूर की आरती उतारें। केला, पायसम (खीर) या पंजीरी का भोग अर्पित करें।

8

प्रसाद वितरण

प्रसाद को परिवार में बाँटें। मंगलवार को मंदिर जाने की विशेष प्रथा है — विशेषतः मुरुगन / कार्तिकेय मंदिर।

📿 मुरुगन मंत्र

ॐ शरवणभव

108 बार

Om Saravanabhava

मुरुगन जी का षडाक्षरी (6 अक्षर) बीज मंत्र। ॐ नमः शिवाय के समकक्ष शक्तिशाली।

ॐ षण्मुखाय नमः

21 बार

Om Shanmukhaya Namah

षट् (6) मुख वाले देव को प्रणाम — बाधा निवारण के लिए।

ॐ सुब्रमण्याय नमः

21 बार

Om Subrahmanyaya Namah

ब्राह्मण-श्रेष्ठ, ज्ञान के देव सुब्रमण्यम को नमन।

भगवान मुरुगन मंगलवार पूजा विधि — सुब्रमण्य स्वामी पूजा | वेदकोश | VedKosh