🛡️ शनि-हनुमान कवच — दोहरी रक्षा
शनि = न्याय (करम) | हनुमान = शक्ति (रक्षा) — दोनों एक साथ।
5 रक्षा शक्तियाँ
💰 ऋण मुक्ति
शनि कवच करम ऋण और पितृ ऋण दोनों के प्रति शनि की कृपा दिलाता है।
🏥 रोग नाश
हनुमान कवच से पुराने रोग, जोड़ दर्द और वात रोग में राहत।
😰 भय निवारण
दोनों कवच का पाठ — कोर्ट केस, शत्रु भय, रात्रि भय दूर।
🪐 साढ़ेसाती रक्षा
शनि कवच विशेष रूप से साढ़ेसाती + ढैया के दौरान प्रभावशाली।
💼 करियर सुरक्षा
नौकरी स्थिरता, पदोन्नति रुकावट दूर — शनि न्याय का सक्रियण।
📿 पाठ विधि
- • शनिवार ब्रह्म मुहूर्त में (4–6 AM) पाठ आदर्श है।
- • पहले हनुमान चालीसा — फिर शनि कवच — फिर हनुमान कवच।
- • 5 बार पाठ — 43 शनिवार लगातार।
- • काले वस्त्र + सरसों तेल दीपक + काले तिल।
शनि कवच
ॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छाया मार्तण्ड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्॥ ॐ श्री शनैश्चराय नमः — रक्षां कुरु कुरु स्वाहा॥
हनुमान कवच
ॐ हनुमते नमः। हनुमान अंजनी सुत वायुपुत्र महाबल। रामेष्ट फाल्गुन सखा पिंगाक्ष अमितविक्रम॥ उदधिक्रमणाय च सीताशोकविनाशन। लक्ष्मण प्राणदात्रे च दशग्रीवस्य दर्पहा॥ एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मनः। स्वापकाले प्रबोधे च यात्राकाले च यः पठेत्॥ तस्य सर्वभयं नास्ति रोगं नश्यति तत्क्षणम्। एवमेव सदा पाठाद् रामस्य दयितो भवेत्॥