🌳 शनिवार पीपल वृक्ष पूजा — पितृ और शनि शांति
संध्या दीपदान + 7 परिक्रमा — दोनों दोषों का एक साथ शमन
पीपल वृक्ष का शनि से संबंध
पुराणों में पीपल वृक्ष को विष्णु, यम और शनि तीनों का वास माना जाता है। शनिवार को पीपल पूजा इसलिए विशेष है क्योंकि शनि और पितृ (यम के अधीन) दोनों एक ही स्थान पर विराजमान होते हैं। एक ही पूजा से दो दोषों का निवारण — यही पीपल दीपदान का अद्भुत रहस्य है।
दीपक दिशा और देवता
| दिशा | देवता | लाभ | तेल |
|---|---|---|---|
| पश्चिम | शनि देव | शनि दोष शमन | सरसों तेल |
| दक्षिण | यम / पितृ | पितृ दोष निवारण | तिल तेल |
| पूर्व | सूर्य देव | करियर और सम्मान | घी |
| उत्तर | कुबेर | धन आगमन | सरसों तेल |
पीपल दीपदान की सम्पूर्ण विधि
स्नान और तैयारी
शनिवार संध्या (5–7 PM) स्नान करें। काले या नीले वस्त्र पहनें। लोहे के दीपक में सरसों तेल भरें।
पीपल वृक्ष के पास जाएं
किसी पार्क, मंदिर प्रांगण या सड़क किनारे पीपल वृक्ष खोजें। पेड़ के पास जाकर प्रणाम करें।
जल अर्पण
पहले पीपल की जड़ में जल डालें। साथ में काले तिल मिलाएं। 7 बार "ॐ शं शनैश्चराय नमः" बोलें।
दीपक जलाना
पश्चिम दिशा की ओर मुख करके दीपक जलाएं। दीपक को पेड़ की पश्चिम दिशा में रखें।
सात परिक्रमा
पीपल वृक्ष की 7 परिक्रमा दक्षिणावर्त (clockwise) करें। प्रत्येक परिक्रमा में "ॐ नमः शिवाय" बोलें।
प्रार्थना और दान
परिक्रमा के बाद पितरों का स्मरण करें और शनि देव से कर्म शुद्धि की प्रार्थना करें। पास खड़े किसी व्यक्ति को उड़द दाल दान दें।