गंगा माता
गंगा माता की आरती
माँ गंगा की पवित्र आरती जो हरिद्वार, काशी और ऋषिकेश के घाटों पर प्रतिदिन लाखों भक्तों द्वारा की जाती है।
इस आरती के बारे में
गंगा माता की यह आरती हरिद्वार की गंगा आरती और काशी विश्वनाथ की गंगा आरती में प्रतिदिन गाई जाती है।
पाठ का समय
हरिद्वार, वाराणसी, ऋषिकेश के घाटों पर प्रतिदिन; गंगा दशहरा और कार्तिक पूर्णिमा पर भी
Hindi Lyrics (मूल पाठ)
ओम जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता। जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥ ओम जय गंगे माता॥ चन्द्र सी जोत तुम्हारी, जल निर्मल आता। शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता॥ ओम जय गंगे माता॥ पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता। कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता॥ ओम जय गंगे माता॥ एक बार जो प्राणी, शरण तेरी आता। यम के दूत उसे, छू भी नहीं पाता॥ ओम जय गंगे माता॥ हरिद्वार, प्रयाग, काशी, पाप सब नाशे। मातु गंगे तुम्हारी, जय-जय हो आशे॥ ओम जय गंगे माता॥
📖 अर्थ / भावार्थ
ओम जय गंगे माता — माँ गंगा की जय हो।
चन्द्र सी जोत तुम्हारी — माँ गंगा का जल चंद्रमा जैसा निर्मल और उज्ज्वल है।
पुत्र सगर के तारे — भगीरथ के आग्रह पर आप राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को तारने आईं।
यम के दूत उसे छू भी नहीं पाता — गंगा की शरण में आने वाले को यमराज के दूत भी नहीं छू सकते।