🔱 शनि त्रयोदशी 2026 — शिव और शनि का दिव्य संयोग

जब प्रदोष व्रत शनिवार को पड़े — शिव-शनि कृपा एक साथ

शनि त्रयोदशी क्या है?

जब त्रयोदशी तिथि (कृष्ण या शुक्ल पक्ष की 13वीं तिथि) शनिवार को पड़ती है, तो उसे "शनि प्रदोष" या "शनि त्रयोदशी" कहते हैं। इस दिन भगवान शिव और शनि देव दोनों की उपासना एक साथ की जाती है। शिव भगवान शनि के गुरु और रक्षक माने जाते हैं, इसलिए यह दिन अत्यंत फलदायी होता है।

शनि त्रयोदशी 2026 — सभी तिथियाँ

तिथिवारपक्षविशेष
10 जनवरी 2026शनिवारकृष्ण त्रयोदशीवर्ष की पहली शनि त्रयोदशी
24 जनवरी 2026शनिवारशुक्ल त्रयोदशीशनि + माघ माह
7 मार्च 2026शनिवारकृष्ण त्रयोदशीमहाशिवरात्रि के निकट
16 मई 2026शनिवारशुक्ल त्रयोदशी⭐ शनि जयंती संयोग — सर्वाधिक शक्तिशाली
26 सितंबर 2026शनिवारकृष्ण त्रयोदशीनवरात्रि काल
10 अक्टूबर 2026शनिवारशुक्ल त्रयोदशीदशहरे के निकट

शनि त्रयोदशी के 3 विशेष उपाय

1. शिव-शनि संयुक्त अभिषेक

प्रदोष काल (शाम 5–7 PM) में पहले भगवान शिव का जल और दूध से अभिषेक करें, फिर शनि देव को सरसों तेल चढ़ाएं। यह संयुक्त अभिषेक शनि की महादशा को भी सौम्य बना देता है।

2. शिव पंचाक्षर + शनि बीज मंत्र

"ॐ नमः शिवाय" 108 बार, उसके बाद "ॐ शं शनैश्चराय नमः" 108 बार। यह क्रम शनि त्रयोदशी को ही सर्वाधिक प्रभावी होता है।

3. नीलांजन समान अभिव्यक्ति

काजल (नीलांजन) से शनि देव का ललाट पर तिलक करें। इस दिन काले तिल से बने पकवान भगवान शिव को भोग लगाकर कुत्ते को दें।

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