शुक्रवार अनुष्ठान — महिलाओं के लिए
शुक्रवार पूजा — गृह शांति
लक्ष्मी आसन, तुलसी पूजा और द्वार रंगोली से घर में शांति और समृद्धि
शुक्रवार की विशेषता
शुक्रवार माँ लक्ष्मी का दिन है। इस दिन महिलाओं द्वारा की गई पूजा परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और आर्थिक समृद्धि लाती है। प्रदोष काल (शाम 6–7:30 बजे) में पूजा सर्वाधिक फलदायी होती है।
शुक्रवार के छह मुख्य अनुष्ठान
लक्ष्मी आसन
घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में लाल/गुलाबी कपड़े पर माँ लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें। शुक्रवार को इस स्थान को विशेष रूप से साफ करें और गुलाब जल छिड़कें।
तुलसी पूजा
तुलसी को जल दें, दीपक जलाएं और 3 बार परिक्रमा करें। तुलसी पर कुमकुम और लाल चुनरी चढ़ाएं। "ॐ तुलस्यै नमः" मंत्र 11 बार जपें।
द्वार रंगोली
घर के मुख्य द्वार पर कमल या स्वस्तिक की रंगोली बनाएं। गुलाबी, सफेद और पीले रंगों का उपयोग करें। इससे लक्ष्मी का स्वागत होता है।
प्रदोष काल दीपक
शाम 6-7:30 बजे (प्रदोष काल) में घर के मुख्य द्वार और तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं। पांच दीपक जलाने से विशेष फल मिलता है।
लक्ष्मी स्तोत्र पाठ
श्री सूक्तम्, लक्ष्मी चालीसा या "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का 108 बार जाप करें। परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर जाप करें।
प्रसाद और दान
खीर, पेड़ा या मिठाई का भोग लगाएं। प्रसाद को पड़ोसियों और जरूरतमंदों में बांटें। शुक्रवार को दान करने से लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
☑ पूजा सामग्री चेकलिस्ट
0/8- लक्ष्मी की मूर्ति या चित्रपूजा स्थान के लिए
- लाल चुनरी या गुलाबी कपड़ालक्ष्मी आसन के लिए
- कमल के फूल या गुलाब5 या 11 फूल
- दीपक — घी का या तेल काप्रदोष काल पूजन
- पंचामृतदूध, दही, घी, शहद, शक्कर
- रंगोली सामग्री — रंग और चावलद्वार रंगोली के लिए
- तुलसी की पत्तियांतुलसी पूजन के लिए
- नारियल और सुपारीसंकल्प के लिए