🙏 हनुमान बाहुक — शारीरिक कष्ट निवारण स्तोत्र

तुलसीदास जी ने अपनी बाहु-पीड़ा से मुक्ति के लिए यह 44 छंदों का स्तोत्र लिखा। शनिवार को इसका पाठ करने से शनि का कोप शांत होता है।

📖 हनुमान बाहुक की रचना का इतिहास

तुलसीदास जी को जीवन के अंतिम काल में बाहु (कंधे और भुजाओं) में असह्य पीड़ा हुई। उन्होंने हनुमान जी से प्रार्थना के रूप में यह स्तोत्र लिखा जिसमें 44 छंद हैं। पाठ पूरा होते ही उन्हें दर्द से राहत मिली। तब से यह पाठ शनि-कष्ट, बाहु-पीड़ा और शारीरिक कष्टों के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

⏰ कब पढ़ें?

शनिवार प्रातःकाल — सर्वोत्तम
🔸मंगलवार को भी पढ़ सकते हैं
🌑शनिश्चरी अमावस्या — विशेष फलदायी
🏥बीमारी या दर्द के समय

📿 प्रमुख छंद (1–5) — अर्थ सहित

छंद 1
किलकिला कीलकिला सिला कीलहू सिला,
केलि कारी कूलकूल कालिका को।
काको काका काकिनी कलत कालिंदी,
केहि कारन लागत यह काल को॥
छंद 2
बाल समय रबि भक्षि लियो तब तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को यह संकट काहु न जात उचारो॥
छंद 3
देवन आनि करी बिनती तब छाड़ि दियो रबि कष्ट निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥
छंद 4
बाहु बल बिक्रम बिपुल मति बल बल बिग्यान।
कोटि सूर्य सम प्रताप प्रभु बलवंत हनुमान॥
छंद 5
सो हौं कृपानिधि कृपा करि हरौ बाहु पीर।
बेगि प्रभु दीजे दरस निज दास की भीर॥

📜 प्रारंभिक मंगलाचरण (कॉपी करें)

श्री हनुमान बाहुक
—तुलसीदास कृत—

ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमितविक्रमाय।
प्रकट पराक्रम श्री हनुमान की जय।

बाहु बल बिक्रम बिपुल मति बल बल बिग्यान।
कोटि सूर्य सम प्रताप प्रभु बलवंत हनुमान॥

सो हौं कृपानिधि कृपा करि हरौ बाहु पीर।
बेगि प्रभु दीजे दरस निज दास की भीर॥

श्री हनुमान चालीसा का पाठ यहाँ करें।
जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥

✨ हनुमान बाहुक पाठ के 6 लाभ

1. कंधे, बाहु और जोड़ों के दर्द में राहत
2. शनि के कोप से सुरक्षा
3. दुर्घटना और आघात से बचाव
4. भूत-बाधा और नकारात्मक ऊर्जा का नाश
5. पुरानी बीमारियों में सुधार
6. मानसिक भय और चिंता से मुक्ति

🪐 हनुमान-शनि संबंध: शनिवार को क्यों पढ़ें?

पौराणिक मान्यता के अनुसार हनुमान जी ने शनि देव को उनके अहंकार से मुक्त कर उनकी पीड़ा दूर की थी। इसलिए हनुमान जी शनि-दोष नाशक माने जाते हैं। जो भक्त शनि की साढ़े साती या ढैय्या में हों, उन्हें शनिवार को हनुमान बाहुक का पाठ विशेष रूप से करना चाहिए।

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